प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:
ब्राजील के शहर रियो में इस साल ओलिंपिक खेलों का सफलता पूर्वक आयोजन हुआ. हर चार पर जिस भी शहर में ओलिंपिक खेलों का आयोजन होता है, वहां नए स्टेडियमों और खेल गांव बनाने के साथ बेहद भव्य तैयारियां की जाती हैं. शहर में दुनियाभर के खिलाड़ी इकट्ठा होते हैं और पूरा शहर ही मानो ओलिंपिक खेलों के रंग में रंग जाता है.
लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि ओलिंपिक खत्म होने के बाद यह जगह कैसी हो जाती है? आयोजन के वक्त ये जगहें जितनी भव्य दिखती थीं, खेल खत्म होने के बाद उतनी ही वीरान और बदसूरत हो जाती हैं. पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ऐसी ही जगहों की तस्वीरें साझा कीं, जहां ओलिंपिक खेलों के दौरान तो खूब रौनक थी, लेकिन अब यहां वीरानी छाई है.
सेराजोवा :
साल 1984 में यूगोस्लाविया का हिस्सा रहे सेराजोवा में शीतकालीन ओलिंपिक का आयोजन हुआ था. हालांकि 10 साल बाद बोस्निया और हर्जगोविना के इससे अलग होने पर यहां जंग छिड़ गई. यह जंग चार वर्षों तक चली, जिस दौरान यह ओलिंपिक वेन्यू हथियारों को रखने के लिए इस्तमाल होता था. अब जंग तो खत्म हो गया है, लेकिन खंडहर में तब्दील हो चुका यह ओलिंपिक स्थल उन भयावह यादों का गवाह बना हुआ है.
एथेंस :
यूनान जिसे अंग्रेजी में ग्रीस कहते हैं, के एथेंस में भले 12 साल पहले ही ओलिंपिक खेलों का आयोजन किया गया था, लेकिन इन 12 सालों में यह जगह खस्ता हालत में पहुंच गई. सॉफ्ट बॉल के लिए इस्तेमाल हुए इन स्टैंड्स पर वक्त की मार साफ झलकती है.
म्यूनिख :
साल 1972 में जर्मनी के म्यूनिख शहर में ओलिंपिक खेलों का आयोजन किया गया. इन खेलों को देखने के लिए आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या को मद्देनजर रखते हुए यहां कई ट्रेन स्टेशन बनाए गए. हालांकि शहर के सुदूर कोने में बने ये स्टेशन आज बिल्कुल वीरान हैं और कहीं-कहीं तो पटरियां भी उखड़ चुकी हैं.
बीजिंग :
साल 2008 में ओलिपिंक खेलों की मेजबानी करने वाले चीन के बीजिंग शहर का हाल भी कुछ ऐसा ही है. चीन ने ओलिंपिक खेलों के लिए बेहद तेजी से स्टेडियमों और खेल गांव का निर्मान किया, लेकिन खेल खत्म होने के बाद उतनी ही तेजी से ये जगहें खंडहर में भी तब्दील हो गईं.
लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि ओलिंपिक खत्म होने के बाद यह जगह कैसी हो जाती है? आयोजन के वक्त ये जगहें जितनी भव्य दिखती थीं, खेल खत्म होने के बाद उतनी ही वीरान और बदसूरत हो जाती हैं. पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ऐसी ही जगहों की तस्वीरें साझा कीं, जहां ओलिंपिक खेलों के दौरान तो खूब रौनक थी, लेकिन अब यहां वीरानी छाई है.
सेराजोवा :
साल 1984 में यूगोस्लाविया का हिस्सा रहे सेराजोवा में शीतकालीन ओलिंपिक का आयोजन हुआ था. हालांकि 10 साल बाद बोस्निया और हर्जगोविना के इससे अलग होने पर यहां जंग छिड़ गई. यह जंग चार वर्षों तक चली, जिस दौरान यह ओलिंपिक वेन्यू हथियारों को रखने के लिए इस्तमाल होता था. अब जंग तो खत्म हो गया है, लेकिन खंडहर में तब्दील हो चुका यह ओलिंपिक स्थल उन भयावह यादों का गवाह बना हुआ है.
Abandoned 1984 Sarajevo Winter Olympics Facilitiesएथेंस :
यूनान जिसे अंग्रेजी में ग्रीस कहते हैं, के एथेंस में भले 12 साल पहले ही ओलिंपिक खेलों का आयोजन किया गया था, लेकिन इन 12 सालों में यह जगह खस्ता हालत में पहुंच गई. सॉफ्ट बॉल के लिए इस्तेमाल हुए इन स्टैंड्स पर वक्त की मार साफ झलकती है.
What the abandoned Athens Olympic venues look like 10 years later. http://t.co/HBlaYGajwg pic.twitter.com/wG86aNrS4M
— Joe Weisenthal (@TheStalwart) August 7, 2014
म्यूनिख :
साल 1972 में जर्मनी के म्यूनिख शहर में ओलिंपिक खेलों का आयोजन किया गया. इन खेलों को देखने के लिए आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या को मद्देनजर रखते हुए यहां कई ट्रेन स्टेशन बनाए गए. हालांकि शहर के सुदूर कोने में बने ये स्टेशन आज बिल्कुल वीरान हैं और कहीं-कहीं तो पटरियां भी उखड़ चुकी हैं.
बीजिंग :
साल 2008 में ओलिपिंक खेलों की मेजबानी करने वाले चीन के बीजिंग शहर का हाल भी कुछ ऐसा ही है. चीन ने ओलिंपिक खेलों के लिए बेहद तेजी से स्टेडियमों और खेल गांव का निर्मान किया, लेकिन खेल खत्म होने के बाद उतनी ही तेजी से ये जगहें खंडहर में भी तब्दील हो गईं.
Before&after!! @annekebeerten @Bentrack1 pic.twitter.com/WZwvtOYSgl
— Jose Antonio Hermida (@Josehermida) May 6, 2014
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