अमर सिंह चमकीला: माटी की आवाज या फूहड़ गायक... हत्या के 38 साल बाद पत्नी-बेटी ने क्या कहा?
पंजाब के जालंधर के मेहसमपुर में 8 मई 1988 को अमर सिंह चमकीला और अमरजोत को दोपहर का शो करना था. इस दिन दोनों को तीन अज्ञात मोटरसाइकिल सवाल ने गोली मार दी. सबसे हैरत कि बात ये है कि इस मामले में कभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई.
पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में अमिट छाप छोड़ने वाले अमर सिंह चमकीला का आज जन्मदिन है. अगर वे आज हमारे बीच होते तो 66 साल की उम्र हो चुकी होती. चमकीला की गायकी ऐसी थी जिसे पंजाब के गांव-गांव में सुना जाता था. वे इतने मशहूर गए थे कि उन्हें 'एल्विश ऑफ पंजाब' कहा जाने लगा था. लेकिन इसके साथ ही विवादों से भी उनका नाता रहा. साल 2024 में इम्तियाज अली की फिल्म 'चमकीला' से उनकी ख्याति मौजूदा दौर में और भी बढ़ गई.
पंजाब में एक धड़ा ऐसा भी मानता था कि उनके गाने अश्लील हैं या दो अर्थ वाले हैं. और यही वजह रही कि उन्हें एक दिन गोली मार दी गई.
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि पंजाब में चमकीला के गाने को लेकर इतना विवाद क्यों था. उनका पहली पत्नी और उनकी बेटियां आज किस हालात में हैं और वो क्या सोचती हैं? इसके साथ ढेरों ऐसे सवाल के जवाब जो चमकीला के बारे में हमें अब तक मालूम नहीं हैं.
जानेंगे अखाड़े में डंका बजाने वाले धनी राम से अमरपाल सिंह चमकीला बनने वाले शख्स की जिंदगी के किस्से और उनकी ख्याति के बारे में.

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कौन थे अमर सिंह चमकीला?
अमर सिंह चमकीला पंजाब में 70 और 80 के दशक के बड़े गायकों में शुमार थे. उनकी गायकी के लोग दीवाने थे. कहा जाता है कि वह बहुत कम समय में फर्श से अर्श तक का सफर तय कर लिया था.
अमर सिंह चमकीला ने दो शादियां की थीं. एनडीटीवी से बात करते हुए अमर सिंह चमकीला कि पहली पत्नी गुरमिल कौर ने बताया कि अमर सिंह पहले बैट्री के कारखाने में काम करते थे.
1978-79 में उनके शादी के कुछ साल बाद अमर सिंह ने खुद गाना लिखकर उन्हें गाना शुरू किया. 'टकुए ते टकुआ खड़के' अमर सिंह चमकिला का पहला रिलीज गाना है.
चमकीला के गाने गांव के परिवेश, ड्रग्स, बंदूकें, एक्ट्रा मैरिटल अफेयर, दहेज जैसे मुद्दों पर तंज करते थे. लेकिन अमर सिंह चमकीला की पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में उस वक्त क्या शख्सियत थी इसपर पंजाबी फिल्मों और गानों पर नजर रखने वाले फिल्म इतिहासकार मनदीप सिंह सिद्धू कहते हैं, "जब चमकीला जी ने संगीत की दुनिया में कदम रखा उस वक्त पंजाब में बहुत सारे फनकार शीर्ष पर बैठे थे. इनमें कुलदीप माणक, सुरिंदर छिंदा जैसे नाम हैं."
मनदीप सिंह कहते हैं, "सुरिंदर छिंदा की मंडली में ही अमर सिंह चमकीला साज बजाते थे. छिंदा ने उनकी काबिलियत पहचानी और गायकी की दुनिया में इन्हें बढ़ावा दिया."

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लेकिन उनकी गायकी को अक्सर सवाल के घेरे में रखा जाता रहा है, कई लोग मानते हैं कि अमर सिंह चमकीला के गाने द्विअर्थी होते थे.
मनदीप सिंह कहते हैं, "चमकीला के गाने हमेशा डबल मीनिंग होते थे. उनके गाने कथित अच्छे परिवारों में पसंद नहीं किये जाते थे. लेकिन खेत में काम करने वाले किसानों और ट्रक चलाने वाले सरीखे लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता काफी थी. ये लोग बैठ कर उनके गाने सुनती थी और खूब पसंद करती थी."

मनदीप सिंह सिद्धू
परिवार ने क्या कहा?
यह सवाल पूछने पर कि अमर सिंह चमकीला के गानों की लोगों ने आलोचना की और उनके गानों को अश्लील बताया इसपर उनकी पत्नी गुरमिल कौर ने एक लाइन में जवाब दिया, "मुझे तो उनके हर गानें ही बढ़िया लगते थे, मैं सब पर झूमती थी."
वहीं अमर सिंह और गुरमिल कौर की पहली बेटी अमनदीप कौर ने एनडीटीवी से कहा, "आज भी कई लोग ऐसे हैं जो डैडी को अच्छा नहीं मानते लेकिन इससे कई गुना अधिक लोग है जो आज भी उनके गानों पर झूमते हैं, उन्हें प्यार करते हैं और याद भी करते हैं. इन लोगों के लिए डैडी रब हैं. अश्लील गानों को लेकर तब डैडी ने कहा था कि वह इन गानों को नहीं गाएंगे लेकिन लोगों ने ही उनसे गाने के लिए कहा था तब उन्हें गाना पड़ा था."

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अश्लीलता के आरोप पर अमनदीप ने जवाब में अमर सिंह चमकीला के धार्मिक गीतों, 'सरहंद दी दीवार', 'बाबा तेरा ननकाना' और 'तलवार में कलगीधर दी हां' का हवाला देते हुए कहा कि ये गाने सुपरहिट हैं.
उन्होंने आगे कहा कि ये ऐसे गाने हैं जो आज भी गुरूद्वारों में बजते है जिसे सुन कर लोगों के मन को शांति मिलती है.
पत्नी गुरमिल कौर ने बातचीत के दौरान अमर सिंह का लिखा गाना 'की जोर गरीबा दां' गाने का भी जिक्र किया. गुरमिल कौर हंसते हुए कहती है, "ऐसा लगता है कि यह गाना उन्होंने (अमर सिंह चमकीला) ने मेरे लिए ही लिखा है."

अमर सिंह चमकीला और उनकी दूसरी पत्नी अमरजोत कौर.
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कैसे हुई मौत?
पंजाब के जालंधर के मेहसमपुर में 8 मई 1988 को अमर सिंह चमकीला और अमरजोत को दोपहर का शो करना था. इस दिन दोनों को तीन अज्ञात मोटरसाइकिल सवाल ने गोली मार दी. सबसे हैरत कि बात ये है कि इस मामले में कभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई.
मौत की वजह पर बात करते हुए फिल्म इतिहासकार मनदीप सिंह सिद्धू कहते हैं, "उस वक्त चमकीला का शख्सियत इतनी बड़ी हो गई थी कि इस इंडस्ट्री के बड़े-बड़े कलाकारों की सिंहासन हिलने लग गए थे. इन लोगों को चमकीला के लगातार बढ़ते मकबूलियत से चिंता होने लगी थी. लोगों को चमकीला से परेशानी होने लगी. वे सोचने लगे की हमारा सामने इंडस्ट्री में आया कलाकार हमसे आगे निकल गया. बेशक चमकीला ने कमाल के गाने गाए थे. उन्होंने लीक से हटकर काम किया."

अमर सिंह चमकीला के गाने देसी मिजाज के होते थे.
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घरवालों की क्या है शिकायत?
अमर सिंह और गुरमिल कौर की पहली बेटी अमनदीप कौर ने एनडीटीवी से कहा कि उन्हें तकलीफ है कि उनके पिता के इतने नाम और इज्जत के बावजूद आजतक पंजाब सरकार ने उनके नाम की कोई सड़क या किसी चौराहे पर उनकी मूर्ति नहीं बनाई है.
अमनदीप कौर कहती हैं, "जो लोग उन्हें प्यार करते हैं वह घर आकर हमसे शिकायत करते हैं कि 35 साल हो गए आप ने उनके याद में कुछ नहीं बनवाया. हमने सरकार से इस सिलसिले में कई बार विनती की लेकिन सबने हमारी बात टाल दी. हर बार उनसे एक ही जवाब सुनने को मिलता है कि अगले साल कुछ करेंगे.हमें इस बात का बेहद दुख है. हम चाहते है उनके नाम कि कोई स्मारक हो कि आने वाली पीढ़ी उन्हें याद रखे."
अमनदीप कौर बताती हैं, "कमलदीप बचपन से ही पापा के गाने गुनगुनाती थी उसे गाने का शौक था लेकिन क्योंकि उसे किसी का कोई फाइनेंशियल सपोर्ट नहीं मिला जो गाने के कैसेट तैयार करने और उन्हें बेचने के लिए जरूरी था इसलिए कमल की गायकी की मंजिल कभी पूरी नहीं हो सकी."
अमर सिंह चमकीला की पत्नी और उनकी बेटियां आज भी एक अंतहीन राह देख रही हैं. उन्हें अपने पति और पिता पर गर्व है.
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