शील्ड और डंडों से लैस पुलिस ने जब CJP प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया… जंतर मंतर पर आधी रात की आंखों देखी
37 दिनों तक नारों से गूंजता जंतर-मंतर... फिर रात के 12 बजते ही सब बदल गया. देखिए छात्र आंदोलन की आखिरी रात की पूरी कहानी.
कुछ मिनट पहले तक यहां सिर्फ नारे थे, तिरंगे थे, पोस्टर थे और जोश में बड़े-बड़े साउंड बॉक्स पर नाचते-गाते हजारों छात्र थे. लेकिन जैसे ही घड़ी में रात के 12 बजे, पूरा मंजर बदल गया. जंतर-मंतर पर सन्नाटा उतरने लगा और 37 दिनों तक चले छात्र आंदोलन का आखिरी अध्याय शुरू हो गया. दिल्ली का जंतर-मंतर पिछले 37 दिनों से प्रदर्शनकारी छात्रों के नारों से गूंज रहा था. सरकार की ओर से छात्रों की मांगें माने जाने के बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने 25 जुलाई की शाम आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया था. बिना बताए दिल्ली पुलिस ने भी आंदोलन की सफलता का जश्न मनाने के लिए छात्रों को देर रात तक का समय दिया. लेकिन रात के ठीक 12 बजे पुलिस ने जंतर-मंतर को चारों ओर से घेर लिया और एक-एक कर हर एंट्री प्वाइंट से छात्रों को बाहर निकालना शुरू कर दिया. एनडीटीवी ग्राउंड जीरो पर मौजूद था. पुलिस को पूरी जगह खाली कराने में मुश्किल से आधा घंटा लगा. तस्वीरों में देखिए, जंतर-मंतर पर उस आखिरी रात क्या-क्या हुआ.

रात के 12 बजे पुलिस एक्टिव मोड में आई और आधे घंटे के अंदर जंतर-मंतर को खाली करा दिया
लोगों को जानकारी नहीं थी 12 बजते जगह खाली करनी होगी
लोगों को और ग्राउंड पर मौजूद पत्रकारों को भी पता नहीं था कि पुलिस 25- 26 जुलाई की दरम्यानी रात 12 बजे जंतर-मंतर खाली करवाएगी. एनडीटीवी से बात करते हुए कई छात्र कह रहे थे कि वे अभी भी यहीं रुकेंगे. लेकिन जैसे ही 12 बजे पुलिस पूरे बल के साथ आई और पहले छात्रों की भीड़ को जनपथ मेट्रो, गेट नंबर 2 वाले एंट्री/एक्जिट प्वाइंट से छात्रों को बाहर निकालने लगी.

Photo Credit: सबकुछ अचानक हुआ, 30 मिनट पहले तक जहां नारे गूंज रहे थे, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ था (फोटो- एनडीटीवी)
यह सब अचानक हुआ. शुरुआत में प्रदर्शनकारियों की भीड़ ऐसे दौड़ती हुई इस गेट से बाहर भागी जैसे पहली नजर में लगा कि लाठीचार्ज हुआ हो. लेकिन ऐसा नहीं था. दिल्ली पुलिस के जवान बड़ी संख्या में आए और रोड की दोनों तरफ मौजूद लोगों को बाहर निकालने लगे.

पुलिस ने जंतर-मंतर खाली कराने का काम दो चरण में किया, पहले छात्रों को जनपथ मार्केट की ओर से बाहर किया (फोटो- एनडीटीवी)
पुलिस ने अपने साथ एक बड़ा सा साउंड सिस्टम भी रखा था. इस पर छात्रों से साफ-साफ कहा जा रहा था कि आंदोलन खत्म हो गया है. अब आप घर को जाइए. मेट्रो रात के 12.30 बजे तक रुका रहेगा.

पुलिस साउंड सिस्टम पर छात्रों को लगातार गाइड कर रही थी, उन्हें वापस लौटने के लिए कह रही थी (फोटो- एनडीटीवी)
यहां पुलिसकर्मियों के साथ उनके अपने कैमरापर्सन भी मौजूद थे जो हर चीज, हर हरकत, हर डेवलपमेंट को कैमरे में कैद कर रहे थे.

दिल्ली पुलिस के अपने कैमरापर्सन भी थे जो सबकुछ अपने कैमरे में कैद कर रहे थे (फोटो- एनडीटीवी)
हालांकि छात्रों का उत्साह भी कम नहीं था. वे बैरिकेडिंग के बाहर जाकर भी नारे लगाते रहे, कुछ समय के लिए ठीक सामने मौजूद रेड लाइट पर ट्रैफिक रुका रहा. इस बीच पुलिस लगातार अपील करती रही कि आप अपने घर लौटिए. जब भीड़ का एक हिस्सा नहीं माना तो पुलिसकर्मियों की एक टीम बाहर निकली और उस भीड़ को रेड लाइट से हटाया और सीपी के अंदरूनी हिस्से की ओर भेज दिया. अब पुलिस एक हिस्सा खाली करा चुकी थी.
वापस उसी रास्ते से अंदर आते हुए रिपोर्टर आंदोलन के मेन सेंटर, जहां मंच लगा था, की ओर बढ़ा. इतनी देर में ही MCD की सड़क साफ करने वाली गाड़ी अपने काम पर लग चुकी थी. एक कर्मचारी रोड को पानी डालकर धोने लगा था. ऐसा लग ही नहीं रहा था कि बमुश्किल 30 मिनट पहले यहां प्रदर्शनकारी बच्चों का हुजूम था.

रात में ही जंतर-मंतर की सड़क को नहला दिया गया, चमका दिया गया (फोटो- एनडीटीवी)

जहां आंदोलन का मंच था, वह रात के 1 बजे तक सुनसान हो गया था (फोटो- एनडीटीवी)
अभी भीड़ पूरी तरह मंच एरिया से बाहर भी नहीं हुई थी कि कचरा एक तरफ करने वाली जेसीबी काम पर लग चुकी था.

दिल्ली पुलिस अपने साथ MCD के कर्मचारियों को लेकर आई थी, आंदोलन के हर निशान को रात में साफ कर दिया गया (फोटो- एनडीटीवी)
पुलिस ने इस भीड़ को सिर्फ जंतर-मंतर ही नहीं पूरे सीपी से बाहर किया. रोड के दोनों तरफ शील्ड और डंडे के साथ पुलिस के जवान तैनात थे. पुलिस आगे बढ़ती गई और नारे लगाते हुए छात्र अपने घर की ओर लौट गए.

दिल्ली पुलिस ने रात में ही सीपी को भी प्रदर्शनकारी छात्रों से खाली करवाया (फोटो- एनडीटीवी)
पुराने हनुमान मंदिर के पास जाकर भीड़ के नारे तेज हो गए लेकिन 1 बजते- बजते दिल्ली का यह इलाका अपने पुराने अंदाज में दिखने लगा. एक आंदोलन का आखिरी अध्याय समाप्त हुआ. जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चला छात्र आंदोलन यहीं अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया.
यह भी पढ़ें: सीजेपी ने सरकार से मनवा ली अपनी बात, अब क्या राजनीति करने उतरेगी कॉकरोच पार्टी?
-
उम्मीद और बेचैनी... जंतर-मंतर से लौटते छात्रों से बातचीत- 'धर्मेंद्र प्रधान से हमारी पर्सनल दुश्मनी नहीं थी'
जंतर-मंतर पर 37 दिनों का आंदोलन खत्म कर घर वापस लौट रहे बच्चे क्या क्या खुद को जीता हुआ महसूस कर रहे हैं. क्या अब उन्हें उम्मीद है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा? NDTV ने उन्हीं से पूछा.
-
मेडिकल का छात्र कैसे बना कारगिल युद्ध का पहला शहीद? कैप्टन सौरभ कालिया की कहानी
मेडिकल के क्षेत्र में शानदार भविष्य होने के बावजूद सौरभ कालिया का सपना देश की सेवा करना था.
-
सीजेपी ने सरकार से मनवा ली अपनी बात, अब क्या राजनीति करने उतरेगी कॉकरोच पार्टी?
सीजेपी ने कहा कि आंदोलन का सफल होना, मुझे लगता है कि हम सभी के लिए बहुत बड़ी बात है. यह गर्व का पल है. यह सच में खुश होने और राहत महसूस करने का पल है और इसके बाद, हम देखेंगे कि आगे क्या होता है.
-
'एक ट्रक दवाएं, 10 हजार सैनिटरी पैड...', जंतर-मंतर पर खाना ही नहीं, मेडिकल मदद की भी आई बाढ़- ग्राउंड रिपोर्ट
जंतर-मंतर पर मौजूद वॉलंटियर डॉक्टरों का कहना है कि कई दिनों तक खुले में रहने के बाद प्रोटेस्टर्स गले में खराश, सिरदर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी से परेशान हो रहे हैं.
-
जुलाई की उमस भरी गर्मी में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, छात्रों ने इसका भी तोड़ निकाला- ग्राउंड रिपोर्ट
जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों ने उमस भरी गर्मी से लड़ने के लिए कई तरह के तोड़ निकाले हैं. फिज़ा में गूंजते इंक़लाबी नारों के साथ हवा में लहरा रहे हाथों में कई तरह के पंखे हैं, जिनके सहारे प्रोटेस्टर्स अपनी और बाहर से आने वाले लोगों के शरीर के पसीने के कम करने की कोशिश कर रहे हैं.
-
सिस्टम को जगाने की जिद में सोना छोड़ बैठा जंतर मंतर... एक रात की कहानी
दिल्ली अगर देश का दिल है तो दिल्ली का दिल है कनॉट प्लेस और इसी कनॉट प्लेस के पास है जंतर मंतर. दिल्ली का ये दिल पिछले एक महीने के एक अलग रफ्तार में धड़क रहा है. वजह है यहां चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का धरना
-
जंतर मंतर के आस-पास 'कई जंतर मंतर', बोल रही हैं दीवारें- Ground Report
दिल्ली के अंदर आमतौर पर दीवारों पर लिखे नारे यूनिवर्सिटी जैसी जगहों पर दिखते हैं. लेकिन अगर आप जनपथ रोड से टॉल्स्टॉय मार्ग लेकर जंतर-मंतर की तरफ़ जाएंगे, तो दीवारें बोलती हुई नज़र आएंगी.
-
''हम बांग्लादेश, नेपाल जैसी हिंसा नहीं चाहते, पुलिस वाले हमारे दुश्मन नहीं, बहुतों ने हमें बचाया''
Jantar Mantar Protest, Ground Report: NDTV ने भोपाल से आए तीन दोस्तों से बात की और समझने की कोशिश की कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर बैठे छात्रों के जेहन में अभी क्या चल रहा है.
-
मास्क थमाया, छाता दिया... दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी इंसानियत की अनकही कहानियां
दिल्ली में सोमवार को हुए सीजेपी के विरोध प्रदर्शन, उग्र और हिंसक घटनाओं के बीच कुछ युवाओं ने इंसानियत की ऐसी मसाल पेश की, जिसे देखकर लगा कि यह पीढ़ी अपना मकसद बखूबी जानती है.
-
अमर सिंह चमकीला: माटी की आवाज या फूहड़ गायक... हत्या के 38 साल बाद पत्नी-बेटी ने क्या कहा?
पंजाब के जालंधर के मेहसमपुर में 8 मई 1988 को अमर सिंह चमकीला और अमरजोत को दोपहर का शो करना था. इस दिन दोनों को तीन अज्ञात मोटरसाइकिल सवाल ने गोली मार दी. सबसे हैरत कि बात ये है कि इस मामले में कभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई.