Explainer: भाजपा और NDA के पक्ष में जेन जी ने 2019 और 2024 में डाला था वोट, पर एक ट्रेंड चिंता की बात

भाजपा को 2019 और 2024 में जेन जी का वोट बड़े पैमाने पर मिला था. लेकिन अब रणनीति में बदलाव की जरूरत लगती है.

दिल्ली के जंतर मंतर समेत देश के कई इलाकों में नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन हुआ है. भले ही यह विरोध प्रदर्शन फिलहाल थम गए हैं, लेकिन चुनावी राजनीति में इसका क्या असर होगा. इसे हर कोई समझना चाहता है. बीते दो चुनावों की बात करें तो 2019 और 2024 के आम चुनाव में इस वर्ग का वोट बड़े पैमाने पर भाजपा के पक्ष में गया था. CSDS के डेटा के अनुसार 2019 के आम चुनाव में 18 से 25 साल के जेन जी वोटर्स के 40 फीसदी लोगों ने भाजपा को वोट दिया था. वहीं कांग्रेस को 20 फीसदी वोट ही मिले थे. अन्य वोट क्षेत्रीय दलों को मिला था.

इसी तरह 2024 में भी भाजपा को ही बढ़त मिली थी और जेन जी का 39 फीसदी वोट उसके हिस्से आया था. कांग्रेस को 21 फीसदी मतदान हुआ था. वहीं एनडीए की बात करें तो 46 फीसदी वोट उसे जेन जी का मिला था, जबकि कांग्रेस की लीडरशिप वाले INDIA ब्लॉक के खाते में 33 पर्सेंट वोट गए थे. इस तरह अब तक भाजपा जेन जी वोटरों के मामले में मजबूत दिखी है, लेकिन क्या भविष्य में भी ऐसा रहेगा, यह उसके लिए सोचने वाली बात है. वहीं जानकार मानते हैं कि जेन जी का वोटिंग पैटर्न विचारधारा आधारित नहीं रहता. वे अपने मुद्दों पर फोकस करते हैं या फिर सीधे चेहरे पर वोट करते हैं. जैसे उनके लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र में कौन उतरा है या फिर सरकार का नेतृत्व कौन करेगा. 

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'भाजपा के लिए यह रणनीति बदलने और जेन जी को समझने का वक्त'

इस संबंध में हमने वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी से भी बातचीत की. वह जेन जी से संवाद के लिए भाजपा की रणनीति में बदलाव की जरूरत बताते हैं. उन्होंने कहा, 'अब तक के चुनावों का वोटिंग पैटर्न बताता है कि भाजपा को फायदा मिला है. लेकिन यह बात भी सही है कि नरेंद्र मोदी बीते 12 सालों से सत्ता में हैं. एक ही चेहरा युवा देख रहे हैं और जो कुछ भी खामियां सिस्टम में दिखती हैं, उसका गुस्सा भी वे सरकार के प्रति जाहिर कर रहे हैं. यह ऐसा समय है, जब भाजपा को अपनी सत्ता के दौर में पहली बार संवाद के स्तर पर कोर्स करेक्शन की जरूरत है. एक अच्छी बात यह है कि विपक्ष फिलहाल जमीन पर कमजोर है और यदि भाजपा ने अपनी संचार की रणनीति में बदलाव करके इस वर्ग को साध लिया तो लंबे समय में उसे फायदा मिलेगा.' 

'सिर्फ परिवार की विचारधारा को ही नहीं मानते जेन जी, खुद तय करते हैं किसे डालें वोट'

वहीं जेन जी के वोटिंग पैटर्न को लेकर उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी पहले के दौर के लोगों की तरह विचारधारा को लेकर बहुत ज्यादा प्रतिबद्ध नहीं है. इनका वोटिंग पैटर्न मुद्दा या व्यक्ति आधारित रहता है. ये पहले की पीढ़ी के युवाओं की तरह वोट नहीं करते, जब बड़ी संख्या में लोग परिवार की विचारधारा को ही स्वीकार कर लेते थे. जेन जी के युवा आकांक्षी हैं और सवाल करते हैं. वे उसे ही वोट देना चाहते हैं, जो उनकी अपेक्षाओं को पूरा करे और जरूरी सवालों के जवाब देकर उम्मीदों पर खरा उतरे.

कितना बड़ा वोट बैंक है जेन जी

कितना बड़ा वोट बैंक है जेन जी

'इंस्टाग्राम पर जाना ही नहीं, मुद्दों को समझना भी जरूरी'

यही सवाल हमने हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर विमल कश्यप से भी किया. उन्होंने भी कहा कि जेन जी की आकांक्षाओं को शायद भाजपा अब अच्छे से समझना चाहेगी. यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने अब इंस्टाग्राम पर जोर देने की बात कर रहे हैं. हालांकि यह एक पक्ष है. वह संचार माध्यम बदलने की बात कर रहे हैं, लेकिम मुद्दों को भी समझने की जरूरत है. यदि जेन जी के मुद्दों और उनकी अपेक्षाओं को समझा जाए तो ज्यादा आसानी होगी और उनसे कनेक्ट किया जा सकेगा.

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