NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच के दौरान राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जम्मारामगढ़ का पूरा परिवार अब सीबीआई के रडार पर है. जांच में सामने आया है कि इस परिवार के चार नहीं, बल्कि पांच सदस्य मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच चुके हैं. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर एक ही परिवार के इतने सदस्य मेडिकल कॉलेजों में कैसे पहुंचे और क्या इसके पीछे पेपर लीक नेटवर्क की भूमिका रही. इस परिवार की पूरी जानकारी अब सामने आ रही है, जिससे शक और भी गहराता जा रहा है.
आरोपी के बेटी ने क्लियर किया था NEET
सीबीआई जांच के मुताबिक आरोपी दिनेश की बेटी गुंजन ने भी नीट परीक्षा पास की थी और उसे बनारस मेडिकल कॉलेज अलॉट हुआ था. इसके अलावा दिनेश और मांगीलाल के बड़े भाई घनश्याम की बेटियां पलक और सोनिया भी नीट क्लियर कर चुकी हैं. सोनिया फिलहाल मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही है. वहीं मांगीलाल की बेटी प्रकृति दौसा मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है और विकास को सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज मिला था.
कई सालों से चल रहा था नेटवर्क?
पता चला है कि पिछले कई सालों से यह नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था. महाराष्ट्र के अहिल्याबाई नगर निवासी धनंजय से पेपर नासिक निवासी शुभम खैरनार तक पहुंचा और वहां से हरियाणा के यश यादव तक. यश यादव पहले सीकर में रहकर नीट की तैयारी कर चुका था, जहां उसकी पहचान विकास से हुई. इसी कनेक्शन के जरिए दिनेश और मांगीलाल इस नेटवर्क से जुड़े. सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि दीपावली के समय ही यश यादव ने विकास और मांगीलाल को भरोसा दिला दिया था कि इस बार पेपर उपलब्ध करा दिया जाएगा. इसके बाद दिनेश ने अपने बेटे ऋषि और भतीजे अमन के लिए कथित तौर पर मोटी रकम देकर पेपर मंगवाया.
लालच में आकर पेपर बेचने के बाद फंसे आरोपी
जांच एजेंसियों के अनुसार पूरा मामला तब खुला जब लालच में आकर पेपर को आगे भी बेच दिया गया. आरोप है कि ऋषि ने राकेश मंडावरिया के जरिए पेपर को बड़े स्तर पर सर्कुलेट किया. परीक्षा से करीब 15 घंटे पहले सीकर के अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों तक पेपर पहुंच गया. इसके बाद पेपर लीक की चर्चा फैल गई और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया.
सीबीआई को यह भी जानकारी मिली है कि जम्मारामगढ़ के कुछ अन्य छात्रों तक भी पेपर पहुंचाया गया था. हालांकि फिलहाल एजेंसी का फोकस उन छात्रों पर नहीं है जिन तक पेपर पहुंचा बल्कि उस नेटवर्क पर है जिसने पेपर को अलग-अलग राज्यों से होते हुए छात्रों तक पहुंचाया.
सीकर निवासी राकेश मंडावरिया से लगातार पूछताछ की जा रही है. सूत्रों के मुताबिक उसे सरकारी गवाह बनाया जा सकता है. वहीं एसओजी की ओर से सीबीआई को सौंपे गए करीब दो दर्जन छात्रों और अभिभावकों में से अधिकांश को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है, लेकिन उन्हें जरूरत पड़ने पर जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं.
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