जोखिम के आधार पर KYC करने का बजट में प्रस्ताव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में डिजिलॉकर सेवा के जरिए पहचान और पते को अपडेट करने के लिए 'एक जगह समाधान' पेश करने का भी प्रस्ताव रखा.

जोखिम के आधार पर KYC करने का बजट में प्रस्ताव

केवाईसी के नियमों में बदलाव होगा

नई दिल्ली:

सरकार ने बुधवार को 'जोखिम-आधारित' नजरिए को अपनाकर केवाईसी KYC प्रक्रिया सरल बनाने का प्रस्ताव रखा. इस समय केवाईसी की 'सबके लिए एक जैसी' व्यवस्था लागू है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में डिजिलॉकर सेवा के जरिए पहचान और पते को अपडेट करने के लिए 'एक जगह समाधान' पेश करने का भी प्रस्ताव रखा.

उन्होंने यह घोषणा भी की कि व्यावसायिक प्रतिष्ठान सरकारी एजेंसियों की डिजिटल प्रणाली के लिए पैन को साझा पहचानकर्ता के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगे. उन्होंने कहा, ''केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इसे 'सभी के लिए एक जैसा' के बजाय 'जोखिम आधारित' नजरिया वाला बनाया जाएगा.''

डिजिटल इंडिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय क्षेत्र के नियामकों को भी केवाईसी प्रणाली के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. 

उन्होंने कह कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों, नियामकों और विनियमित संस्थाओं द्वारा जारी किए गए व्यक्तियों की पहचान और पते के मिलान और उन्हें अपडेट करने के लिए एक जगह समाधान उपलब्ध कराया जाएगा. इसे डिजिलॉकर सेवा और आधार को मूलभूत पहचान के रूप में इस्तेमाल करके स्थापित किया जाएगा.

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