NCR में घर का सपना? दिल्ली-नोएडा से अलग मेरठ, रेवाड़ी, रोहतक, पलवल... सस्ते में शानदार मकान, सफर भी आसान
Delhi-NCR Plan and Your Dream Home: कहां आप दिल्ली-नोएडा-गुरुग्राम के चक्कर में पड़े हैं. कई सालों से अपना घर लेने का सपना देख रहे हैं... फ्लैट्स, मकान, सब बजट से बाहर जा रहे हैं तो थोड़ा आसपास के शहर घूम आइए. नहीं समझे? ये स्टोरी पढ़िए, सबकुछ समझ आ जाएगा.
"मैं पहले दिल्ली के मयूर विहार में किराये पर रहता था. नोएडा सेक्टर-6 में मेरा दफ्तर था. 5-6 साल तक मैं दिल्ली या नोएडा में अपना घर लेने की सोचता रहा. 30 से ज्यादा मकान और फ्लैट्स देखे भी, लेकिन सारे मेरे बजट से बाहर थे. अब मैंने मेरठ के रिठानी में अपना घर ले लिया है. तीन महीने हो गए. घर से RRTS स्टेशन रिठानी और वहां से 40 मिनट में न्यू अशोक नगर. फिर 10 मिनट में दफ्तर. महीने में 20-22 दिन ऑफिस आने का खर्च बामुश्किल 5 हजार रुपये. इसका 3 गुना तो नोएडा में घर का किराया लग जा रहा था. अब अपनी जमीन के साथ वाला घर भी हो गया और दफ्तर जाने की भी दिक्कत नहीं रही. सुकून है, लाइफ में अब तो."
32 साल के गौरव शर्मा ने NDTV से जब अपनी ये कहानी साझा की तो हमें भी लगा कि बात में दम तो है. NCR में घर लेने का सपना भी पूरा हो गया और दफ्तर आने-जाने की भी टेंशन नहीं रही. पिछले दिनों जब NCR बोर्ड की मीटिंग में रीजनल प्लान पर फैसला हुआ, आने वाले समय में 30 मिनट कनेक्टिविटी को संभव बताया गया तो एक बात तो साफ हो गई कि दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम में नौकरी या अपना बिजनेस कर रहे ऐसे लाखों लोगों के लिए ये एक बड़ा मौका है, जो NCR में अपना घर लेने का सपना देख रहे हैं.
मुड़ चुका है विकास का पहिया, संवरेंगे कई शहर
देश की राजधानी दिल्ली, नोएडा या गुरुग्राम के मुख्य इलाकों में अपना आशियाना बनाने का सपना देखने वाले लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है. अगर कोर सिटीज में आसमान छूती कीमतों और रॉकेट की रफ्तार से बढ़े बजट के कारण घर खरीदना आपकी जेब पर भारी पड़ रहा है, तो अब निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का नक्शा अब पूरी तरह बदलने जा रहा है. नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) के 'रीजनल प्लान 2041' और सरकार की नई नीतियों के तहत अब विकास का पहिया दिल्ली-नोएडा के सैचुरेटेड हो चुके कोर इलाकों से निकलकर बाहरी कॉरिडोर्स की तरफ मुड़ चुका है.
ओमेक्स के MD मोहित गोयल का कहना है कि दिल्ली अब रोजगार, आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर का एकमात्र केंद्र नहीं रह सकता. NCR की जनसंख्या 2041 तक 11 करोड़ के करीब पहुंचने का अनुमान है, ऐसे में उनका मानना है कि इस क्षेत्र का भविष्य, विस्तार में है. ट्राइडेंट रियल्टी के CEO परविंदर सिंह भी मानते हैं कि NCR में कई ग्रोथ सेंटर विकसित करने होंगे, जो आर्थिक गतिविधियों और आवास की मांग को अधिक समान रूप से बांट सके.

इन शहरों में कम बजट में साकार होगा आपका सपना
एक्सपर्ट्स का भी साफ मानना है कि जो लोग भीड़भाड़ से दूर, प्रदूषण मुक्त माहौल में कम कीमत के अंदर आधुनिक सुविधाओं और बड़े आकार का घर चाहते हैं, उनके लिए ये शुरुआती निवेश का सबसे सुनहरा मौका है. कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरून गर्ग के अनुसार, 'दिल्ली-NCR का रियल एस्टेट बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. दिल्ली और मुख्य गुरुग्राम में घरों की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं. ऐसे में खरीदार अब उन क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं, जहां किफायती कीमत पर बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें.'
यदि आप दिल्ली-नोएडा की महंगी प्रॉपर्टी के कारण तनाव में हैं, तो NCR के इन 18 से अधिक शहरों में आपके लिए रियल एस्टेट के शानदार विकल्प खुल चुके हैं.
- हरियाणा के हॉटस्पॉट: सोनीपत, रोहतक, झज्जर, पानीपत, पलवल, रेवाड़ी, नूंह (मेवात), महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, जींद और करनाल.
- उत्तर प्रदेश के उभरते हॉटस्पॉट्स: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली.
इन इलाकों में प्रॉपर्टी की अनुमानित दरें आज भी मुख्य दिल्ली या गुरुग्राम के मुकाबले बेहद कम हैं.
- उदाहरण के लिए, बहादुरगढ़, झज्जर और बादली कॉरिडोर में स्वतंत्र फ्लोर्स और प्लॉट्स की कीमतें 3,500 रुपय से 5,500 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हैं.
- वहीं, सोहना और पलवल बेल्ट में 'दीन दयाल जन आवास योजना' (DDJAY) के तहत गेटेड टाउनशिप में प्लॉट्स 70,000 से 95,000 प्रति वर्ग गज की किफायती रेंज में उपलब्ध हैं. यहां 45 लाख से 80 लाख रुपये के बजट में आलीशान फ्लैट या इंडिपेंडेंट फ्लोर मिल जाता है.
- उत्तर प्रदेश के न्यू नोएडा (DNGIR) क्षेत्र में भी आवासीय प्लॉट्स और फ्लैट्स की शुरुआती कीमत 4,500 से 6,500 रुपये प्रति वर्ग फुट के आसपास रहने की उम्मीद है.
दूरी की टेंशन खत्म: सरकार का विजन '30-मिनट का NCR'
अक्सर लोग सस्ते घर के चक्कर में बाहरी शहरों में जाने से सिर्फ इसलिए डरते थे कि रोजाना ऑफिस आने-जाने (अप-डाउन) में उनका पूरा दिन और एनर्जी बर्बाद हो जाएगी. लोग सोचते थे कि नौकरी चलानी है, तो महंगे किराए या भारी-भरकम होम लोन की ईएमआई भरकर भी मुख्य शहर में ही रहना पड़ेगा. लेकिन आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस पूरी सोच और डर को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है.
गर्ग कहते हैं कि गाजियाबाद का एनएच-24 और सिद्धार्थ विहार इसका अच्छा उदाहरण बनकर सामने आया, जहां नमो भारत रैपिड रेल और एक्सप्रेसवे के आने से दिल्ली पहुंचने में महज 30 मिनट का समय लगता है.' ऐसा दूर के कई शहरों के लिए भी संभव होगा.
सरकार का मुख्य लक्ष्य अब पूरे क्षेत्र को '30-मिनट का NCR' बनाना है. यानी आप दिल्ली से 70-80 किलोमीटर दूर भी रह रहे हों, तो भी महज 30 से 45 मिनट के भीतर अपने दफ्तर पहुंच जाएंगे. इस कनेक्टिविटी क्रांति को मुमकिन बना रहे हैं ये मेगा प्रोजेक्ट्स-
- नमो भारत रैपिड रेल (RRTS)
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
- केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेसवे
- द्वारका एक्सप्रेसवे
- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे
इसके अलावा, भविष्य में यात्रा को और सुगम बनाने के लिए सोनीपत-पानीपत, गाजियाबाद-मेरठ, फरीदाबाद-पलवल-जेवर एयरपोर्ट, बहादुरगढ़-रोहतक और गुरुग्राम-मानेसर-रेवाड़ी जैसे कई नए रूट्स पर मेट्रो के विस्तार की योजना पाइपलाइन में है.

मेरठ का सबसे बड़ा उदाहरण है सामने
इस बदलते दौर का सबसे सटीक और जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर मेरठ है. नमो भारत रैपिड रेल (RRTS) के शुरू होने के बाद मेरठ और दिल्ली-नोएडा के बीच की दूरी महज एक नंबर बनकर रह गई है. आज मेरठ का युवा दिल्ली, गाजियाबाद या नोएडा में बेहतरीन कॉर्पोरेट जॉब कर रहा है और रोजाना सिर्फ 100 से 150 रुपये के मामूली खर्च पर नमो भारत रेल के जरिए अप-डाउन कर रहा है.
वो दिनभर दिल्ली में नौकरी करता है और रात को वापस मेरठ अपने घर जाकर चैन की नींद सोता है. हाई-स्पीड, वाई-फाई और वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं से लैस इन रैपिड ट्रेनों ने सफर की थकान को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे लोग अब दूर रहकर भी मुख्य आर्थिक केंद्रों से सीधे जुड़ गए हैं.
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की हालिया बैठक में NCR में 'नमो नोड्स' के नाम से 4 नए ग्रीनफील्ड शहर (टाउनशिप) विकसित करने पर भी सहमति बनी है, जो आने वाले समय में विकेंद्रीकृत विकास (De-Centralised Growth) को नई ऊंचाई देंगे.
भविष्य के ग्रोथ सेंटर बनेंगे आसपास के शहर
वोमेकी ग्रुप के फाउंडर एंड चेयरमैन गौरव के सिंह का कहना है, 'जो लोग मुख्य शहरों की महंगी प्रॉपर्टी के कारण घर खरीदने का सपना छोड़ रहे हैं, उनके लिए आसपास के इलाकों में ढेर सारे नए अवसर हैं. यहां आधुनिक टाउनशिप, बेहतर सड़क नेटवर्क और आरआरटीएस जैसी सुविधाओं के कारण ट्रैवल टाइम काफी कम हो गया है. सबसे अच्छी बात यह है कि यहां लोगों को कम कीमत में बड़े घर और आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं.'
साफ है कि NCR का भविष्य अब केवल गुरुग्राम, दिल्ली या नोएडा के सेक्टर्स तक सीमित नहीं है. रोहतक के खुले प्लॉट्स, मेरठ और पानीपत के नए टाउनशिप, और रेवाड़ी-पलवल के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स आने वाले दिनों में उत्तर भारत के नए रियल एस्टेट हॉटस्पॉट्स बनने जा रहे हैं. समय रहते किया गया यह निवेश न सिर्फ आपके पैसे बचाएगा, बल्कि आपको एक बेहतरीन जीवनशैली भी देगा.
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