हंसाने वाले जब बने फिल्ममेकर तो क्यों मिली हार? जॉनी वॉकर से राजपाल यादव तक, कॉमेडियन की अधूरी कहानी

Comedians Turned Filmmakers: हास्य कलाकारों और फिल्म निर्माण का रिश्ता बहुत पुराना है. हिंदी सिनेमा में कई कॉमेडियन ने एक्टिंग के बाद निर्देशन और निर्माण में हाथ आजमाया, लेकिन ज्यादातर को नुकसान उठाना पड़ा.

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महमूद/असरानी फोटो

Comedians Turned Filmmakers: हास्य कलाकारों और फिल्म निर्माण का रिश्ता बहुत पुराना है. हिंदी सिनेमा में कई कॉमेडियन ने एक्टिंग के बाद निर्देशन और निर्माण में हाथ आजमाया, लेकिन ज्यादातर को नुकसान उठाना पड़ा. हाल के वर्षों में राजपाल यादव की फिल्म असफल रही, लेकिन यह कहानी नई नहीं है. गोल्डन एरा के मशहूर कलाकार जॉनी वॉकर ने भी 1985 में फिल्म पहुंचे हुए लोग बनाकर निर्देशन की दुनिया में कदम रखा, मगर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई.

महमूद

इसके बाद नाम आता है महमूद का, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में भाईजान कहा जाता था. वह शानदार कॉमेडियन थे और कई कलाकारों को मौका देने के लिए भी जाने जाते थे. उन्होंने करीब 8 फिल्मों का निर्देशन और 5 फिल्मों का निर्माण किया. कुंवारा बाप जैसी भावनात्मक फिल्म भी उन्होंने बनाई. बतौर निर्माता बॉम्बे टू गोवा, पड़ोसन और सबसे बड़ा रुपया जैसी हिट फिल्में दीं, लेकिन उनके खाते में कई फ्लॉप फिल्में भी रहीं. आई एस जौहर ने भी निर्देशन में हाथ आजमाया. जोहर महमूद इन गोवा और जोहर महमूद इन कश्मीर जैसी फिल्में बनाई. उन्होंने डुप्लीकेट कलाकारों के साथ 5 राइफल जैसी अलग प्रयोग वाली फिल्में बनाईं. उनकी कुछ फिल्में सफल भी रहीं, लेकिन उन्हें भी संघर्ष का सामना करना पड़ा.

सूरमा भोपाली

शोले के सूरमा भोपाली यानी जगदीप ने 1988 में सूरमा भोपाली फिल्म का निर्देशन किया. फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा और धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारों ने गेस्ट भूमिका निभाई, फिर भी फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही. यह हाल कुछ वैसा ही था जैसा बाद में राजपाल यादव की अता पता लापता के साथ हुआ.

असरानी

असरानी, जिन्हें शोले में जेलर के रोल से पहचान मिली, उन्होंने 3 फिल्मों का निर्माण और 8 फिल्मों का निर्देशन किया. चला मुरारी हीरो बनने, सलाम मेमसाब और हम नहीं सुधरेंगे जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकीं. हालांकि उनकी गुजराती फिल्म अहमदाबाद नो रिक्शावालो हिट रही.

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दरअसल, हास्य कलाकारों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी छवि होती है. दर्शक उन्हें हंसाने वाले किरदार में ही देखना पसंद करते हैं. जब वे गंभीर या अलग सोच के साथ फिल्म बनाते हैं, तो दर्शक उन्हें उस रूप में आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते. यही वजह है कि कई शानदार कॉमेडियन फिल्म निर्माण में वह सफलता हासिल नहीं कर पाए, जो उन्हें अभिनय में मिली.

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