अक्षय से वरुण तक, आखिर क्यों बढ़ रहा है बॉलीवुड में भोजपुरी संगीत का क्रेज?

हिंदी फिल्मों और भोजपुरी संगीत का रिश्ता नया नहीं है. लंबे पॉप, डिस्को और पंजाबी गानों के कल्चर के बीच अब भोजपुरी इंडस्ट्री ने मजबूती से अपनी जगह बनाई है.

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फिल्मों में बढ़ रहा भोजपुरी मैजिक
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नई दिल्ली:

‘घिस-घिस', ‘पड़ोसन' और ‘पनवाड़ी' जैसे गानों के जरिए हिंदी फिल्मों में भोजपुरी रंग लगातार गहरा हो रहा है. आखिर इसकी वजह क्या है और कैसे भोजपुरी संगीत बन रहा है देशभर के दर्शकों की पसंद? हाल ही में वेलकम टू द जंगल के ट्रेलर लॉन्च के दौरान भोजपुरी फिल्मों की सुपरस्टार अक्षरा सिंह ने कहा, “मुझे इस बात पर गर्व है कि भोजपुरी इतने बड़े स्तर पर जाना जा रहा है.”

अक्षरा की बात में काफी सच्चाई भी है. आज बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे भोजपुरी संगीत की धुनों पर थिरकते नजर आ रहे हैं. वेलकम टू द जंगल के गाने घिस-घिस में अक्षय कुमार अक्षरा सिंह के साथ भोजपुरी अंदाज में डांस करते दिखाई दे रहे हैं. इससे पहले है जवानी तो इश्क होना है के गाने पड़ोसन में वरुण धवन भोजपुरी रंग में नजर आए थे. वहीं कुछ वक्त पहले आई फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी का गाना पनवाड़ी भी काफी चर्चा में रहा. सिर्फ यही नहीं, पिछले कुछ वर्षों में कई हिंदी फिल्मों और गानों में भोजपुरी संगीत और लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली है.

हालांकि हिंदी फिल्मों और भोजपुरी संगीत का रिश्ता नया नहीं है. एक दौर था जब दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन तक भोजपुरी भाषा और लोक संगीत से प्रेरित गीतों पर नजर आते थे. फिर समय बदला. पॉप, डिस्को और पश्चिमी संगीत का प्रभाव बढ़ा. उसके बाद लंबे समय तक पंजाबी गानों का दौर चला. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भोजपुरी संगीत ने एक बार फिर मुख्यधारा की फिल्मों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है.

इसके पीछे कई कारण हैं. दर्शकों की पसंद में बदलाव, पंजाबी संगीत का लगातार बढ़ता इस्तेमाल और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का विस्तार, इन सभी ने भोजपुरी संगीत को नई पहचान दी है. यूट्यूब, म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स ने भोजपुरी गानों को बिहार और पूर्वांचल की सीमाओं से निकालकर पूरे देश और विदेशों तक पहुंचा दिया है. यही वजह है कि आज करीब 2000 करोड़ रुपये की भोजपुरी संगीत इंडस्ट्री लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है.

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पारा म्यूजिक की संस्थापक राशना पोचखानावाला कहती हैं, “पिछले कुछ वर्षों में भोजपुरी संगीत उद्योग ने बहुत तेजी से विकास किया है. सटीक राजस्व के आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में अलग हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से आया है. आज भोजपुरी कंटेंट सिर्फ बिहार और पूर्वांचल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत और दुनिया भर में बसे भारतीय समुदाय तक पहुंच रहा है. यूट्यूब, शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स और म्यूजिक स्ट्रीमिंग सेवाओं ने इसकी पहुंच और कमाई दोनों को बढ़ाया है. आज भोजपुरी संगीत भारत के सबसे ज्यादा सुने जाने वाले क्षेत्रीय संगीत प्रारूपों में शामिल है और हमें लगता है कि आने वाले वर्षों में इसकी विकास दर और तेज होगी.”

मनोज तिवारी, पवन सिंह, खेसारी लाल यादव, निरहुआ और शिल्पी राज जैसे कलाकार ऐसे नाम हैं जिन्होंने भोजपुरी संगीत को देश और विदेश में नई पहचान दिलाई है. आज भोजपुरी इंडस्ट्री के राजस्व का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से आता है. इसके अलावा भोजपुरी कलाकार देश-विदेश में लाइव शो करके भी अच्छी कमाई करते हैं.

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जब हिंदी फिल्मों के बड़े सितारे भोजपुरी गानों पर थिरकते हैं तो इन गीतों की पहुंच और भी बढ़ जाती है. बॉलीवुड में भोजपुरी संगीत के बढ़ते इस्तेमाल पर राशना पोचखानावाला कहती हैं, “बिल्कुल. मैं इसे भोजपुरी संगीत की मुख्यधारा में स्वीकृति के रूप में देखती हूं. जब बॉलीवुड सितारे और हिंदी फिल्में भोजपुरी गानों या भोजपुरी रंग को अपनाती हैं तो इससे भाषा और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है. हालांकि यह भी सच है कि भोजपुरी संगीत की लोकप्रियता पहले से ही दर्शकों की बदौलत बढ़ रही थी. सोशल मीडिया, शादियों, रील्स और यूट्यूब ने भोजपुरी गानों को अपने आप पूरे देश में लोकप्रिय बनाया. बॉलीवुड ने इस रुझान को और तेज कर दिया है, लेकिन इसकी असली मांग दर्शकों ने पैदा की है.”

भोजपुरी संगीत की सफलता का एक बड़ा कारण इसका मनोरंजन से भरपूर होना और लोक संस्कृति से गहरा जुड़ाव भी है. यहां के लोकगीतों की झलक और आधुनिक संगीत का मेल लोगों को आकर्षित करता है. हाल ही में शिल्पी राज और अरविंद अकेला कल्लू के गाने राउंड राउंड के रिलीज के मौके पर अरविंद ने कहा, “राउंड राउंड एक मजेदार और जोशीला गाना है, जिससे दर्शक तुरंत जुड़ाव महसूस करेंगे. दूसरे हिट भोजपुरी गानों की तरह यह गीत भी पूरी तरह मनोरंजन को ध्यान में रखकर बनाया गया है और हमें उम्मीद है कि भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भोजपुरी संगीत पसंद करने वाले लोगों को यह खूब पसंद आएगा.”

भोजपुरी संगीत की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में हिंदी फिल्मों में भोजपुरी गानों और भोजपुरी रंग का इस्तेमाल और बढ़ेगा. निर्माता और निर्देशक भी इस इंडस्ट्री की ताकत को समझने लगे हैं. हो सकता है कि भविष्य में कोई नया ट्रेंड आ जाए, लेकिन फिलहाल भोजपुरी संगीत का दौर शुरू हो चुका है और इसके लंबे समय तक जारी रहने के पूरे संकेत दिखाई दे रहे हैं. फिलहाल इतना तय है कि भोजपुरी संगीत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय पहचान भर नहीं रह गया है, बल्कि भारतीय लोकप्रिय संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है.

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