कौन थे जसवंत सिंह खालरा? जिनकी जिंदगी पर बनी दिलजीत दोसांझ की फिल्म, मांगे गए थे 127 कट्स, 3 साल बाद OTT पर हुई रिलीज

तीन साल तक सेंसर बोर्ड में अटकी दिलजीत दोसांझ की फिल्म आखिरकार ‘सतलज’ नाम से रिलीज हो गई, जानिए आखिर कौन थे जसवंत सिंह खालरा और क्यों इतना विवाद हुआ.

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जसवंत सिंह खालरा पर बनी है दिलजीत दोसांझ की सतलज

करीब तीन साल तक सेंसर बोर्ड की मंजूरी का इंतजार करने के बाद आखिरकार दिलजीत दोसांझ की चर्चित फिल्म ‘पंजाब 95' दर्शकों तक पहुंच गई है. हालांकि यह फिल्म अपने पुराने नाम से नहीं, बल्कि ‘सतलज' शीर्षक के साथ OTT पर रिलीज की गई है. दिलचस्प बात यह है कि जिस फिल्म में कभी 127 कट लगाने की बात कही गई थी, वह अब बिना किसी कट के रिलीज होने की खबरों के चलते फिर चर्चा में है. फिल्म एक ऐसे शख्स की जिंदगी पर आधारित है, जिसने पंजाब में कथित फर्जी एनकाउंटर और मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की थी. यही वजह है कि इस फिल्म का इंतजार सिर्फ दर्शकों को ही नहीं, बल्कि इसमें मुख्य भूमिका निभाने वाले दिलजीत दोसांझ को भी लंबे समय से था.

कौन थे जसवंत सिंह खालरा?

फिल्म की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन से प्रेरित है. पेशे से वह अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े थे, लेकिन समाज में हो रही कथित ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी जाने जाते थे. कहा जाता है कि एक परिचित के अचानक लापता होने के बाद उन्होंने इस मामले की पड़ताल शुरू की. जांच के दौरान उन्हें ऐसे रिकॉर्ड मिले, जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिला कि कई लोगों का अंतिम संस्कार लावारिस बताकर किया गया था. इसके बाद उन्होंने इस पूरे मुद्दे को सार्वजनिक मंचों पर उठाया और इसे लेकर कई दस्तावेज भी सामने रखे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अचानक हो गए लापता

साल 1995 में जसवंत सिंह खालरा ने एक प्रेस नोट जारी कर दावा किया था कि पंजाब के कई श्मशान घाटों में बड़ी संख्या में अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार किया गया. उनके मुताबिक, इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. इस खुलासे के कुछ समय बाद ही वह अचानक लापता हो गए. प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर पुलिसकर्मी अपने साथ ले गए थे. बाद में यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना और मानवाधिकार संगठनों ने भी इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई.

CBI जांच में क्या सामने आया?

बाद में मामले की जांच CBI को सौंपी गई. जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर एजेंसी ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया. अदालत की सुनवाई के बाद इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया. कुछ अधिकारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य को अलग-अलग अवधि की जेल हुई. इस फैसले ने देशभर में मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर नई बहस छेड़ दी और जसवंत सिंह खालरा का नाम न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोगों में प्रमुखता से लिया जाने लगा.

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‘पंजाब 95' से ‘सतलज' तक का सफर

निर्देशक हनी त्रेहन की इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95' रखा गया था. रिलीज से पहले CBFC ने फिल्म में 127 बदलाव और कट लगाने का सुझाव दिया था. इनमें कुछ किरदारों, घटनाओं और स्थानों से जुड़े बदलाव भी शामिल बताए गए. इन्हीं कारणों से फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच सकी. इस बीच फिल्म का प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसे पॉजिटिव रिस्पांस मिला. अब फिल्म ‘सतलज' नाम से OTT पर रिलीज की गई है. इसमें दिलजीत दोसांझ के साथ कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्याण भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं. 

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Diljit Dosanjh
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