शक्ति कपूर को बॉलीवुड में आइकॉनिक विलेन के रोल में जाना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके पेरेंट्स इसके लिए तैयार नहीं था. यहां तक कि उन्हें पर्दे पर रोल एक महिला के साथ बद्तमीजी करता देख शक्ति कपूर के पेरेंट्स थियेटर छोड़ कर चले गए थे. अल्फा निओन स्टूडियोज को दिए इंटरव्यू में शक्ति कपूर ने कहा, जब मेरी दो बड़ी फिल्म रिलीज हुईं और एक और बड़ी फिल्म रिलीज हुई, जिसका नाम इंसानियत का दुश्मन था. तो मैंने अपने पेरेंट्स से जाने को कहा और फिल्म देखने को कहा. मेरे माता-पिता देखने को गए. हालांकि जब फिल्म शुरु हुई तो मेरे पहले सीन में मुझे एक लड़की का दुपट्टा खींचते हुए दिखाया गया.
शक्ति कपूर के पेरेंट्स हो गए थे नाराज
पेरेंट्स के रिएक्शन पर आगे शक्ति कपूर ने कहा, मेरे पिता ने तुरंत मेरी मां से उठने को कहा और थियेटर छोड़ कर चले गए. उन्होंने कहा, पहले यह बाहर करता था और अब बड़ी स्क्रीन पर भी यही करता है. देखो ये क्या कर रहा है. मैं यह फिल्म नहीं देखना चाहता. उन्होंने मुझे बुलाकर डांटा. किस तरह के रोल तुम कर रहे हैं? और देखो ऐसी चीजें कौन कर रहा है? उन्होंने मुझे कहा कि मुझे अच्छे आदमी के रोल करने चाहिए और हेमा मालिनी औऱ जीनत अमान के साथ काम करना चाहिए. तुम गुंडे जैसे रोल क्यों कर रहे हो. वह मुझसे यह कहते.
पेरेंट्स को शक्ति कपूर ने कही ये बात
शक्ति कपूर को शुरुआती दिनों में स्ट्रगल करना पड़ा. वह अपने पेरेंट्स की सलाह पर ध्यान नहीं चाहते थे. इसीलिए मैंने उनसे कहा, आपने मुझे जन्म दिया और आपने मुझे मुझे ये चेहरा दिया है. इस चेहरे को देखने के बाद कोई मुझे अच्छे आदमी या हीरो का रोल नहीं दे रहा.
श्रद्धा कपूर को भी बचपन में नहीं था पिता शक्ति कपूर का नेगेटिव रोल
इससे पहले शक्ति कपूर की बेटी और एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर ने कुबूल किया कि वह जब छोटी थीं तो पिता को नेगेटिव किरदार निभाते देखना उन्हें पसंद नहीं था. श्रद्धा कपूर ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, मैं उन पर विलेन के रोल करने को लेकर चिल्लाती थी. मैं इसे लेकर उदास होती थी. लेकिन मेरी मां तब मुझे समझाया कि यह सिर्फ एक्टिंग है. गौरतलब है कि शक्ति कपूर ने 90 के दशक में नेगेटिव रोल को लेकर पॉपुलर हुए थे. उनका अंदाज अपना अपना में क्राइम मास्टर गोगो, कुर्बानी में रंजीत, गुंड्डा में बुल्ला और कई विलेन के रोल ने उनके करियर को ऊंची उड़ान दी.