यह कहानी है, हंगामाखेज संगीतकार की, जिन्होंने महज सात साल की उम्र में हुनर दिखाना शुरू कर दिया था. पता चल गया था कि आगे चलकर यह बालक एक बड़ा संगीतकार बनेगा. जिनका नाम है, अनवर मलिक और उन्हें अब सभी लोग अनु मलिक के नाम से जानते हैं. 2 नवंबर 1960 को जन्मे अनु मलिक के घर में संगीतमय माहौल रहता था, जिसका गहरा असर बचपन से ही उन पर रहा. उन पर शंकर-जयकिशन के गानों ने गहरा असर छोड़ा. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं खुशनसीब हूं कि सरदार मलिक (संगीत निर्देशक) का बेटा हूं और मेरे मामा हसरत जयपुरी (जाने-माने गीतकार) हैं. मैं बचपन से उस माहौल में पला-बढ़ा हूं.”
जब अनु मलिक ने एक मराठी कविता को कंपोज किया था, जिसे बाद में अपने पिता सरदार मलिक को सुनाया तो वह हैरान थे. इसके बाद उन्होंने बेटे का इम्तिहान लिया और बहुत सारे अलग-अलग गाने उनके सामने रख दिए. अनु मलिक को उन गानों की धुन बनाने को कहा गया था. फिर अनु मलिक ने धुन बनाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक अलग-अलग धुन बना डाली. उन धुनों को सुनकर पिता बेहद खुश हुए और अनु मलिक को गले लगा लिया.
बहुत ही कम उम्र में अनु मलिक गानों को कंपोज करने लगे थे. मामा हसरत जयपुरी के लिखे गाने को जब उन्होंने कंपोज किया, तब उसे सुनकर सब दीवाने हो गए. 16-17 साल की उम्र में अनु मलिक को बतौर म्यूजिक कंपोजर काम करने का अवसर मिला. अपने जमाने के कमीडियन मोहन चोटी की 1978 में फिल्म ‘हंटरवाली 77' आई, जिसमें पिता सरदार मलिक की जगह अनु मलिक को काम करने का मौका मिला.
“जुल्मों सितम पर इतराने वाले, तू भी तो इक दिन मिट जाएगा. तेरा जमाना है मैंने माना, मेरा भी एक दिन आ जाएगा." इस गाने को मशहूर गायिका आशा भोसले ने गाया था, जिसे संगीत अनु मलिक ने दिया. यह उनका पहला गाना था. इस गाने के बोल हसरत जयपुरी ने लिखे. एफसी मेहरा की फिल्म ‘एक जान हैं हम' से अनु मलिक को सही शुरुआत मिली और फिर एक फिल्म मिली ‘सोनी महिवाल', जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा. फिल्म ‘बाजीगर' में दिए गए संगीत ने अनु मलिक को नई पहचान दिलाई. फिर फिल्म ‘बॉर्डर' में अनु मलिक के संगीतबद्ध सभी गाने हिट रहे. फिल्म ‘रिफ्यूजी' के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया था.
शौहरत की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद अनु मलिक पर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गानों की धुनें और संगीत संयोजन (अरेंजमेंट) चुराने के आरोप भी लगते रहे. 2017 में 'एंटरटेनमेंट की रात' शो के दौरान ‘रोडीज' फेम रघु राम ने उनसे सीधे तौर पर धुनें चुराने के बारे में सवाल किया. इसके जवाब में मलिक ने अपना बचाव करते हुए कहा कि ‘ईश्वर के अलावा कोई भी मौलिक (ओरिजिनल) नहीं है' और प्रेरणा लेना, चोरी करने से बिल्कुल अलग बात है. उन्होंने इस संदर्भ में 'बॉर्डर', 'एलओसी कारगिल' और 'मैं हूं ना' जैसी फिल्मों के अपने काम का उदाहरण दिया था.
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