पलाश मुच्छल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. इस बार वो एक कानून पचड़े में फंसते दिख रहे हैं. दरअसल पलाश के खिलाफ स्मृति के दोस्त ने एफआईआर दर्ज कराई है. मामला स्मृति से जुड़ा नहीं है लेकिन शिकायतकर्ता स्मृति के दोस्त विज्ञान माने हैं. विज्ञान का दावा है कि पलाश ने उनके खिलाफ जातिवादी टिप्पणी की, जिसके आरोप में मामला दर्ज किया गया है. अब इस पूरे मामले में पलाश मुच्छल के वकील श्रेयांश मिथारे ने एनडीटीवी के संवाददाता प्रशांत से बात की. नीचे पढ़ें बातचीत के अंश:-
प्रशांत: मैं यही पूछना चाहूंगा आपसे कि यह जो केस है, यह पहले भी विज्ञान ने शायद फाइल किया था और अभी दोबारा ये कुछ नए दावे कर रहे हैं?
श्रेयांश मिथारे: नहीं, नहीं. क्या है, मैं आपको बताता हूं. इसमें 26 तारीख को इन्होंने बहुत सारे न्यूज चैनल्स को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें इन्होंने कहा था कि पलाश ने मेरे साथ 40 लाख की धोखाधड़ी की है. और उस धोखाधड़ी को लेकर 'आई एम फाइलिंग अ कंप्लेंट' सांगली पुलिस स्टेशन में. उस चीज को इन्होंने काफी उछाला था और इंटरव्यूज की एक सीरीज दी थी. उसके आधार पर हम बॉम्बे हाईकोर्ट के दरवाजे खटखटाए. बॉम्बे हाईकोर्ट में पहले हमने उन्हें 10 करोड़ का मानहानि का नोटिस भेजा.
प्रशांत: जी.
श्रेयांश मिथारे: उसके बावजूद भी वह अपनी बात से पीछे नहीं हटे, इसलिए हमने बॉम्बे हाईकोर्ट में 11 करोड़ का मानहानि का मुक़दमा दायर किया. जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट पहले ही उनके खिलाफ 'रिस्ट्रिनिंग ऑर्डर' दे चुका है कि आप मीडिया में पलाश के खिलाफ कुछ नहीं बोल सकते और उन्हें और बदनाम नहीं कर सकते. इस आदेश के बावजूद उन्होंने इंटरव्यू देना जारी रखा, जिसके लिए हम उनके खिलाफ 'कंटेंप्ट पिटीशन' यानी अदालत की अवमानना का मामला लाने की योजना बना रहे हैं.
प्रशांत: जी.
श्रेयांश मिथारे: दूसरी बात, उन्हें लगता है कि यह सिर्फ एक प्रेशर टैक्टिक है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें मानहानि के मामले में अपना पक्ष रखने के लिए दो बार बुलाया, लेकिन वह नहीं आए. अब इस चीज का दबाव बनाने के लिए, ताकि हम मानहानि का केस वापस ले लें या उनके साथ समझौता कर लें, उन्होंने यह झूठा एट्रोसिटी का केस फाइल किया है.
प्रशांत: यह हाईकोर्ट में आपने मानहानि का केस कब डाला था?
श्रेयांश मिथारे: यह हमने तुरंत फरवरी में ही डाला था और हमारे पास 'रिस्ट्रिनिंग ऑर्डर' भी है. वह ऑर्डर 11 फरवरी का है. मैंने आपको उसकी कॉपी व्हाट्सएप पर भी भेज दी है. इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू देना जारी रखा और कह रहे हैं कि यह एट्रोसिटी का केस है. वह दावा कर रहे हैं कि 22 नवंबर 2025 को, पलाश की शादी से एक दिन पहले, पलाश ने उनके साथ गाली-गलौज की और उनकी जाति पर टिप्पणी की.
प्रशांत: जी.
श्रेयांश मिथारे: अगर इतना दिन हुआ था, 22 नवंबर से लेकर आज हम मई के महीने में हैं, तब तक आपने कोई शिकायत क्यों नहीं की? आपने पहले सिर्फ वित्तीय विवाद की बात की थी, लेकिन जातिगत टिप्पणी का आरोप लेकर आप अभी तक सामने नहीं आए थे. इससे पता चलता है कि उनके इरादे सही नहीं हैं और वह सिर्फ पब्लिसिटी पाना चाहते हैं. हम इसका कानूनी रूप से उचित जवाब देंगे.
प्रशांत: अच्छा, वह अपने आप को स्मृति का दोस्त बता रहे हैं, क्या यह बात ठीक है?
श्रेयांश मिथारे: वह हमें पता नहीं है, स्मृति ही बेहतर बता पाएँगी. लेकिन हम उनसे उनके पिता के जरिए ही मिले थे. पलाश के लिए सांगली जाने की कभी कोई नौबत ही नहीं आई कि वह विज्ञान माने से मिलें, क्योंकि पलाश मुंबई के निवासी हैं.
प्रशांत: ठीक है सर, बहुत-बहुत शुक्रिया.