फ़िल्म गुस्ताख़ इश्क़ आज यानी 28 नवंबर को रिलीज़ हो गई. फ़िल्म के निर्माता और मशहूर फ़ैशन व कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर मनीष मल्होत्रा, निर्देशक विभु पुरी और फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे विजय वर्मा से एनडीटीवी ने ख़ास बातचीत की. फ़िल्म की कहानी इश्क़ और जज्बातों के इर्द-गिर्द घूमती है और विजय वर्मा की रोमांटिक छवि भी हमेशा चर्चा में रही है, इसलिए इस बातचीत में उनके किरदार, रोमांस और ज़िंदगी के अनुभवों पर भी सवाल किए गए. जब उनसे पूछा गया कि कई कलाकारों को रोमांटिक सीन करने में मुश्किल होती है, क्या उन्हें भी ऐसा अनुभव हुआ? इस पर विजय ने खुलकर बात की.
विजय वर्मा बोले, “नहीं, बिल्कुल मुश्किल नहीं था. क्योंकि रोमांस किसने नहीं किया? ज़िंदगी में सबसे इजी, एक्सेसिबल इमोशन रोमांस ही तो है. रियल लाइफ़ में आदमी रोमांस कर लेता है, लेकिन रियल लाइफ़ में मर्डर नहीं करते हो. तो स्क्रीन पर वो करना मुश्किल होता है. रोमांस में कोई दिक्कत नहीं होती. इनफैक्ट अगर को-एक्टर के साथ दोस्ती और कंफ़र्ट हो, तो वो और आसान हो जाता है. और स्क्रिप्ट में जो ‘पहले जैसा' प्यार है, यह रोमांस भी वैसा ही है , जहां बोला कम जाता है, समझा ज़्यादा जाता है. दूरी में भी इकरार है, तकरार नहीं है. बहुत सारी चीजें इस फ़िल्म में ऐसी हैं. जो सेट पर कम और दिल में ज़्यादा सेट होती हैं.”
जब उनसे पूछा गया कि उनके किरदार और उनकी असली ज़िंदगी में कितना मेल है, तो उन्होंने कहा- “रोमांटिक तो मैं हूँ ही रोमांटिक एट हार्ट. लेकिन कभी-कभी एंबिशन और प्यार के बीच युद्ध हो जाता है. वो चीज़ मैंने अपनी लाइफ़ में भी ऑब्ज़र्व की है.” इसके बाद सवाल आया कि किसे ज़्यादा तवज्जो दी जाए: एंबिशन या प्यार? विजय ने कहा- “कॉलेज से लेकर इंडस्ट्री में आने तक कई साल स्ट्रगल किया. सोचना पड़ता था — नाम कमाने और सर्वाइवल पर ध्यान दूं या प्यार को जगह दूं? वही कशमकश इस फ़िल्म में भी मेरे किरदार में है.”
जब पूछा गया कि अब वह कशमकश दूर हो गई है या अभी भी है, तो विजय मुस्कुराए और बोले- “नहीं… अभी तो फाइन बैलेंस में चल रही है ज़िंदगी.” फ़िल्म गुस्ताख़ इश्क़ अब सिनेमाघरों में है और दर्शकों को एक नर्म, सच्चा और दिल से महसूस किया गया रोमांस देखने को मिलेगा.