अवधी भाषा का ठेठ देहाती गीत, 44 साल बाद भी हेमलता बाली की आवाज देती है सुकून, बना हिंदी सिनेमा कल्ट क्लासिक गाना

हेमलता बाली के गाए 44 साल पुराने गाने में अवधी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जो ठेठ देहाती को और भी मिठास से भरा बना देता है.  

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हेमलता बाली ने पॉपुलर किया अवधी भाषा का ठेठ देहाती गीत
नई दिल्ली:

बॉलीवुड की जानी मानी सिंगर्स में से एक हेमलता बाली अपने अनूठे गीतों से कानों में रस घोल देती हैं. उनके गानों की लिस्ट में 'अंखियों के झरोखों से' को काफी पसंद किया जाता है. लेकिन उन्हीं गानों की लिस्ट में उनका एक 44 साल पुराना गाना भी है, जिसमें अपनी मखमली आवाज से अवधी भाषा का ठेठ देहाती गीत गाकर उन्होंने फैंस का दिल जीत लिया था. वहीं खास बात यह है कि फिल्म में नजर आए लीड एक्टर्स को पॉपुलैरिटी हासिल करवाई. वहीं आज भी यह गांव देहात में खूब गाया जाता है. 

अवधी भाषा का ठेठ देहाती गीत

हम बात कर रहे हैं 1982 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई फैमिली फिल्म नदिया के पार की, जिसमें कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया गाना खूब पॉपुलर हुआ था. इस गाने को हेमलता बाली ने आवाज दी थी. वहीं सचिन पिलगांवकर और साधना सिंह पर यह फिल्माया गया था, जिसे खूब पसंद किया गया. वहीं गाने के बोल अवधि भाषा में इस्तेमाल किए गए, जो कि मूलरूप से उत्तरप्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषा है. 

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5000 से ज्यादा गीत गा चुकी हैं हेमलता बाली 

16 अगस्त को जन्मीं प्लेबैक सिंगर हेमलता ने 13 साल की उम्र में ही सिंगिंग के क्षेत्र में कदम रखा था. हेमलता ने अपने करियर में 5,000 से अधिक गीत गाए. उन्हें 1977-81 की अवधि में पांच बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. 1977 में फिल्म 'चितचोर' के लिए एक बार यह पुरस्कार जीता था, जिसमें उन्होंने येसुदास के साथ युगल गीत "तू जो मेरे सुर में" गाया था, जिसकी रचना रवींद्र जैन ने की थी. 

राजस्थान और हैदराबाद से जुड़े हैं तार

हेमलता का जन्म हैदराबाद में लता भट्ट के रूप में एक मारवाड़ी ब्राह्मण परिवार में हुआ था, लेकिन उनका परिवार मूल रूप से राजस्थान के चुरू जिले के सेहला गांव का निवासी है. गाने का शौक उन्हें बचपन से ही था. उन्होंने अपना बचपन कलकत्ता (अब कोलकाता) में बिताया. उनका विवाह योगेश बाली से हुआ था, जो फिल्म अभिनेत्री योगिता बाली के छोटे भाई थे. हेमलता के पति का 1988 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह अपने बेटे आदित्य के साथ रहती हैं. 

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दिग्गज सिंगरों के साथ गाए गाने

हेमलता ने अपने पिता और गुरु पंडित जयचंद भट्ट की तरह शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की. बाद में वह कलकत्ता से मुंबई आ गईं. उन्होंने काफी संघर्ष के बाद कल्याण जी आनंद जी और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश, दिग्गज गायिका लता मंगेशकर और आशा भोसले के साथ भी गाने गाए. हेमलता कव्वाली, हल्के-फुल्के गाने, गजल, भजन और अन्य कई शैलियों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाती हैं. बाद में, रवींद्र जैन के साथ मिलकर उन्होंने कई अन्य गानों पर काम किया. 

हेमलता बाली के पॉपुलर गाने 

हेमलता ने विभिन्न भारतीय फिल्मों, संगीत, टीवी धारावाहिकों और संगीत एल्बम को अपनी मधुर आवाज दी. इसके साथ ही, उन्होंने 'अंखियों के झरोखों से', 'कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया', 'तू इस तरह से मेरी जिंदगी में' जैसे यादगार गीत गाए हैं, जो आज भी संगीत प्रेमियों के सिर चढ़कर बोलते हैं. 38 भाषाओं में गाने गा चुकीं हेमलता न सिर्फ अपने करियर का, बल्कि अपनी जिंदगी का भी दूसरा दौर जी रही हैं. उनके पुत्र आदित्य बाली अभिनय की दुनिया में पैर जमाने को तैयार हैं. 

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