सेना में मेजर थे इस एक्ट्रेस के पिता, कश्मीर हमले में हुए थे शहीद, आतंकवादियों ने किया अगवा और रखी ऐसी मांग...

हाल के दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के बारे में चर्चा तेज़ हो गई है. पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए हैं. ऐसे ही पलों में हमें असली नायकों की याद आती है.

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सेना में मेजर थे इस एक्ट्रेस के पिता
नई दिल्ली:

हाल के दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के बारे में चर्चा तेज़ हो गई है. पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए हैं. ऐसे ही पलों में हमें असली नायकों की याद आती है और उनके परिवार के लोगों ने उनकी गौरव की कहानियां सुनाई. अभिनेत्री निमरत कौर के दिवंगत पिता मेजर भूपेंद्र सिंह भी एक बहादुर सेना के अधिकारी थे. वह 1994 में कश्मीर में एक आतंकवादी हमले में शहीद हो गए थे. बॉम्बे टाइम्स के साथ एक पुराने बाचचीत में निमरत कौर ने अपने पिता के बारे में बात की और बताया कि कैसे आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी. उन्होंने कहा, "वे (मेजर भूपेंद्र सिंह) एक युवा थे, जो सेना में मेजर थे. वह वेरीनाग नाम के स्थान पर सेना में बतौर  इंजीनियर कार्यरत थे."

अभिनेत्री ने बताया था, उन दिनों कश्मीर के हालात काफी खराब थे.  इसलिए जब उनके पिता वहां तैनात थे, तब निमरत और उनका परिवार पटियाला में रह रहे थे. उन्होंने बताया, "हम जनवरी 1994 में अपनी सर्दियों की छुट्टियों पर थे और कश्मीर में अपने पिता से मिलने गए थे. जब हिज्ब-उल-मुजाहिदीन ने उन्हें उनके कार्यस्थल से अगवा कर लिया.." बाद में उनकी हत्या हो गई. अपने पिता की हत्या के पीछे दिल दहला देने वाली वजह बताते हुए, निमरत कौर ने खुलासा किया कि आतंकवादियों ने कुछ मांगें रखी थीं - कुछ व्यक्तियों की रिहाई की मांग की - जिसे उनके पिता ने अपने कर्तव्य के प्रति सच्चे रहते हुए पूरा करने से इनकार कर दिया.

निमरत कौर ने बताया, "जब उनकी मृत्यु हुई, तब वे (मेजर भूपिंदर सिंह) सिर्फ़ 44 साल के थे. हमें खबर मिली और हम उनके पार्थिव शरीर के साथ दिल्ली वापस आए और मैंने उनका पार्थिव शरीर पहली बार दिल्ली में ही देखा. फिर हम नोएडा चले गए और कुछ महीनों तक मेरे नाना-नानी के साथ रहे, उसके बाद मेरी मां ने अपना घर खरीदा (मेरे पिता की पेंशन के पैसे और हमारी बचत से). और हम वहां से चले गए."

एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि उनके पिता की शहादत के बाद, सरकार ने उनके परिवार को राजस्थान में ज़मीन का एक टुकड़ा आवंटित किया. उनकी बहादुरी को श्रद्धांजलि के रूप में, मेजर भूपेंद्र सिंह को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया - जो भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों में से एक है.


 

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