‘मेरा दिल ये पुकारे आजा, मेरे गम के सहारे आजा…' ये बोल सुनते ही आज भी एक पुरानी मोहब्बत की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है. 1954 की फिल्म ‘नागिन' का यह गीत लता मंगेशकर की आवाज में विरह और इंतजार का दर्द समेटे हुए है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने का भाव उदासी और किसी की याद में तड़पना था, वही बाद में सोशल मीडिया पर डांस वीडियो की वजह से फिर वायरल हो गया. इस तरह करीब सात दशक पुराने गीत ने नई पीढ़ी को भी अपनी धुन पर झूमने के लिए मजबूर कर दिया.
लता की आवाज और वैजयंतीमाला का जादू
‘मेरा दिल ये पुकारे आजा' को लता मंगेशकर ने गाया था. इसके बोल राजेंद्र कृष्ण ने लिखे और संगीत हेमंत कुमार ने दिया. फिल्म में यह गीत वैजयंतीमाला और प्रदीप कुमार पर फिल्माया गया था. गाने के बोलों में अपने प्रिय के लौट आने की पुकार है, इसलिए इसे फिल्म के प्रमुख विरह गीतों में गिना जाता है. ‘नागिन' के संगीत में लता की आवाज ने प्रेम, दर्द और इंतजार को अलग पहचान दी.
फिल्म ‘नागिन' का निर्देशन नंदलाल जसवंतलाल ने किया था. इसमें वैजयंतीमाला ने माला और प्रदीप कुमार ने सनातन का किरदार निभाया था, जबकि जीवन ने प्रबीर की भूमिका निभाई. कहानी दो दुश्मन जनजातियों के प्रेमी जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म की सफलता में इसके संगीत का बड़ा योगदान माना जाता है.
जब दर्द भरे गीत पर होने लगा डांस
इस गाने का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि इसकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्म तक सीमित नहीं रही. 2022 में सोशल मीडिया पर एक डांस वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक लड़की ने इस पुराने गीत पर डांस किया. इसके बाद गाने की धुन पर बड़ी संख्या में लोगों ने वीडियो बनाए. इस ट्रेंड ने एक बार फिर साबित किया कि पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की लोकप्रियता समय के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि नए अंदाज में लौट आती है.
‘नागिन' की सफलता और संगीत का इतिहास
1954 में रिलीज हुई ‘नागिन' उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल थी. बॉलीवुड हंगामा के बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड के अनुसार, फिल्म का भारत में कुल कलेक्शन करीब 1.5 करोड़ रुपये रहा और इसे ब्लॉकबस्टर बताया गया है. हालांकि यह आंकड़ा उस दौर की कमाई का है, इसलिए आज के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से इसकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती.
गाना देखने के लिए यहां क्लिक करें
फिल्म के संगीत में ‘मन डोले मेरा तन डोले', ‘जादूगर सैंया' और ‘तेरे द्वार खड़ा एक जोगी' जैसे गीत भी शामिल थे. ‘मेरा दिल ये पुकारे आजा' की खासियत यह रही कि यह सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के लिए प्रेम और इंतजार की आवाज बन गया. यही वजह है कि आज भी इसके बोल सुनते ही लोग इसे पहचान लेते हैं और इसकी धुन पर झूम उठते हैं.
यह भी पढ़ें: 2003 की वो फिल्म, 13 में से 12 गानों में सलमान खान की आवाज बने उदित नारायण, एक गाने से छाए सुखविंदर सिंह