कभी-कभी मोहब्बत का सबसे खूबसूरत इजहार जवानी की दहलीज पर नहीं, बल्कि उम्र के उस पड़ाव पर होता है, जहां साथ निभाने का मतलब और गहरा हो जाता है. 1965 की फिल्म ‘वक़्त' का ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं' ऐसा ही गीत है. पर्दे पर बलराज साहनी और अचला सचदेव की उम्रदराज जोड़ी, मन्ना डे की आवाज और साहिर लुधियानवी के बोलों ने इसे यादगार बना दिया. दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने को देखकर आज भी पति-पत्नी मुस्कुरा उठते हैं, वह अपने दौर में युवाओं के बीच भी बेहद लोकप्रिय हुआ था. हालांकि, इसकी धुन के अफगानी संगीत से प्रेरित होने का दावा मिलता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह धुन अफगानिस्तान के मशहूर संगीतकार, चित्रकार और कवि उस्ताद अब्दुल गफूर ब्रेषना द्वारा तैयार की गई थी. अफगानिस्तान में यह धुन दरी (फारसी) भाषा के एक लोकगीत 'मुदती शुद के तुरा' के रूप में बहुत लोकप्रिय थी.
उम्रदराज प्रेम का ऐसा अंदाज, जो बन गया सदाबहार
‘ऐ मेरी जोहरा जबीं' को खास बनाती है इसकी सादगी. यह किसी नए इश्क की कहानी नहीं, बल्कि साथ जी चुके दो लोगों के बीच प्यार, अपनापन और नोकझोंक का गीत है. बलराज साहनी और अचला सचदेव पर फिल्माया गया यह गाना दिखाता है कि रोमांस की कोई उम्र नहीं होती. फिल्म के संगीतकार रवि और गीतकार साहिर लुधियानवी ने इस भाव को इतने सहज अंदाज में पेश किया कि गीत पीढ़ियों तक याद रह गया.
मन्ना डे की आवाज और ‘वक्त' की शानदार स्टारकास्ट
इस गीत को मन्ना डे ने गाया था. फिल्म में बलराज साहनी, राज कुमार, सुनील दत्त, शशि कपूर, साधना और शर्मिला टैगोर जैसे सितारे नजर आए. यश चोपड़ा के निर्देशन और बी. आर. चोपड़ा के निर्माण में बनी ‘वक़्त' की कहानी एक परिवार के बिछड़ने और फिर दोबारा जुड़ने के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म 28 जुलाई 1965 को रिलीज हुई थी.
बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार कामयाबी
‘वक्त' सिर्फ संगीत के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कहानी और स्टारकास्ट की वजह से भी सफल रही. उपलब्ध बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने करीब 6 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया और 1965 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही. इसका संगीत भी बेहद लोकप्रिय हुआ और ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं' आज तक हिंदी सिनेमा के उन गीतों में गिना जाता है, जिन्हें सुनकर उम्रदराज प्रेम की खूबसूरती महसूस होती है.