गुलजार और आरडी बर्मन की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गाने दिए, लेकिन इनकी जोड़ी से जुड़ा एक किस्सा ऐसा भी है, जिसमें शुरुआत नाराजगी से हुई और नतीजा एक मास्टरपीस के रूप में सामने आया. पहले तो ये गाना यानि गुलजार के लिखे बोल पढ़कर आरडी बर्मन यानी पंचम दा काफी परेशान हो गए थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इन पंक्तियों पर धुन आखिर बनेगी कैसे. उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि ऐसे बोलों पर गाना कैसे बनाया जाए. लेकिन फिर जो हुआ, उसने इस पूरे किस्से को हिंदी फिल्म संगीत की यादगार कहानियों में शामिल कर दिया. यहां बात हो रही है इजाजत फिल्म के गीत ‘मेरा कुछ सामान… तुम्हारे पास'
अब अखबार की हेडलाइन पर भी बनानी पड़ेगी क्या धुन
इस गाने के बोल बाकी फिल्मी गानों से काफी अलग थे. इनमें कोई तय तुक या पारंपरिक तरीके से बनाई गई लाइनें नहीं थीं. गुलजार ने रिश्ते, यादों और पीछे छूट गई चीजों को बिल्कुल अलग अंदाज में शब्द दिए थे. कहा जाता है कि जब आरडी बर्मन ने ये बोल देखे तो उन्हें समझ नहीं आया कि इन पर धुन कैसे तैयार की जाए. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ऐसे ही चलता रहा तो कल से किसी अखबार की हेडलाइन भी लाकर दे दी जाएगी और उस पर गाना बनाना पड़ेगा.
इसे चुनौती की तरह लिया पंचम ने
हालांकि पंचम दा ने इन्हीं अजीब लगने वाले बोलों को चुनौती की तरह लिया. उन्होंने गुस्से में ही गाने की धुन पर काम शुरू किया और महज 15 मिनट में इसकी धुन तैयार कर दी. यही गाना आगे चलकर ऐसा यादगार बना कि इसे सिर्फ फिल्म का एक गीत मानकर भुलाया नहीं जा सका. ‘मेरा कुछ सामान' को आशा भोसले ने अपनी आवाज दी और गाने के बोल गुलजार ने लिखे थे. संगीत आरडी बर्मन का था.
जिस गाने पर हुई थी बहस, उसी ने दिलाए दो नेशनल अवॉर्ड
इस गाने की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा इसके बाद आता है. जिस गीत को लेकर शुरुआत में पंचम दा इतने परेशान थे, उसी के लिए गुलजार को बेस्ट लिरिसिस्ट का नेशनल अवॉर्ड मिला. आशा भोसले को भी इसी गाने के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड मिला.
‘इजाजत' की कहानी भी थी कुछ अलग
फिल्म को गुलजार ने निर्देशित किया था और इसमें रेखा, नसीरुद्दीन शाह और अनुराधा पटेल मुख्य भूमिकाओं में थे. कहानी एक ऐसे अलग हो चुके कपल की है, जिनकी अचानक रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में मुलाकात होती है. फिल्म की कहानी की तरह ही ‘मेरा कुछ सामान' भी रिश्ते की यादों और पीछे छूट गई चीजों को एक अलग अंदाज में सामने रखता है. शायद यही वजह है कि पंचम दा को शुरुआत में मुश्किल लगने वाले वे बोल बाद में हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में शामिल हो गए.