दिखेगी गांधी बनाम गोडसे की गई कहानी, रिलीज होगी फिल्म ‘कौन सही’

फिल्म किसी पक्ष का समर्थन करने के बजाय इतिहास के कई आयामों को सामने लाती है और अतीत के जटिल पहलुओं को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर देती है.

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दिखेगी गांधी बनाम गोडसे की नगई कहानी

2026 में रिलीज होने जा रही बहुप्रतीक्षित फिल्म कौन सही भारतीय इतिहास के सबसे संवेदनशील और चर्चित वैचारिक संघर्ष को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने के लिए तैयार है. यह फिल्म महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे के बीच मौजूद गहरे वैचारिक मतभेदों, नैतिक द्वंद्वों और इतिहास की अलग-अलग व्याख्याओं को गंभीरता से परखती है. तीखे संवादों, भावनात्मक टकरावों और मानवीय दृष्टिकोणों से भरपूर कौन सही किसी एक निष्कर्ष को थोपने के बजाय दर्शकों को सोचने, समझने और स्वयं निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है.

वह कहानी, जिसे भारत ने कभी पूरी तरह नहीं सुना

30 जनवरी 1948 का वह दिन भारतीय इतिहास की दिशा हमेशा के लिए बदल गया. कौन सही उसी ऐतिहासिक क्षण को केंद्र में रखते हुए एक ऐसी बहस को फिर जीवित करती है, जो आज तक समाप्त नहीं हुई अहिंसा बनाम प्रतिरोध, और सत्य बनाम इतिहास.

फिल्म किसी पक्ष का समर्थन करने के बजाय इतिहास के कई आयामों को सामने लाती है और अतीत के जटिल पहलुओं को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर देती है. यही कारण है कि इसे वर्ष की सबसे विवादास्पद और बहुचर्चित फिल्मों में से एक माना जा रहा है.

दमदार कलाकार और अनुभवी टीम

फिल्म का निर्माण डॉ. पवन तोड़ी द्वारा किया गया है तथा निर्देशन की कमान मनोज सिंह ने संभाली है. लेखक अनुज कुमार द्वारा लिखित यह कहानी गहराई और संवेदनशीलता से भरपूर है. वहीं अमित सिंघराज सह-निर्माता के रूप में इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़े हैं.

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फिल्म में कलाकारों की एक प्रभावशाली टोली नजर आएगी, जिनमें वर्षा उसगांवकर, राज प्रेमी, अमित रियान, डॉ. पवन तोड़ी, विजय ऐदासानी, ललितेश झा, कुंदन कुमार, धर्मेंद्र गुप्ता, आरती शर्मा, मदन कबीर, शंतोष पंडित और अच्छे मियां शामिल हैं. सभी कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से इस ऐतिहासिक कथा को भावनात्मक गहराई प्रदान की है.

फिल्म के बारे में
कौन सही एक विचारोत्तेजक ऐतिहासिक ड्रामा है, जो भारत के सबसे बड़े वैचारिक संघर्षों में से एक को दर्शकों के सामने नए रूप में प्रस्तुत करती है. यह फिल्म दर्शकों को उस दौर में ले जाती है, जहाँ इतिहास केवल लिखा नहीं गया, बल्कि सवालों के घेरे में भी खड़ा हुआ. अपनी साहसिक कहानी और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से कौन सही लंबे समय से बनी धारणाओं को चुनौती देने का प्रयास करती है.

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