बिना मूंछ वाले लड़कों को नौकरी नहीं देता था मालिक, 46 साल पहले आई इस कॉमेडी फिल्म का आज तक नहीं है कोई तोड़

उत्पल दत्त कड़क अंदाज में भी कमाल की कॉमिक टच देकर दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला देते थे. आज भी कॉमेडी फिल्म का नाम लेते ही सबसे पहले उनकी फिल्म ‘गोल माल’ सामने आती है और लोग यूं ही मुस्कुरा देते हैं.

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हैप्पी बर्थडे उत्पल दत्त
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नई दिल्ली:

बड़ी-बड़ी आंखें, कड़क मूंछ और गंभीर आवाज...अरे अरे इस पर मत जाइए, हम बात कर रहे हैं गजब की कॉमिक टाइमिंग संग गुदगुदाने वाले जादूगर उत्पल दत्त के बारे में. दत्त कड़क अंदाज में भी कमाल की कॉमिक टच देकर दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ला देते थे. आज भी कॉमेडी फिल्म का नाम लेते ही सबसे पहले उनकी फिल्म ‘गोल माल' सामने आती है और लोग यूं ही मुस्कुरा देते हैं. 29 मार्च को दत्त की 96वीं जयंती है, आइए उनकी गुदगुदाने वाली फिल्मों पर डालते हैं एक नजर...  

उत्पल दत्त ने बंगाली फिल्म ‘माइकल मधुसुधन' से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने हिंदी में भी भले ही कम फिल्में की हो, लेकिन हर फिल्म में उन्होंने अपने अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी, जो अमिट है. इस सूची में पहले नंबर पर है ‘गोल माल' तो इसके बाद ‘शौकीन', ‘नरम-गरम', 'किसी से ना कहना' और 'अंगूर' जैसी फिल्में शामिल हैं.

गोलमाल:- ‘गोलमाल है भई सब गोलमाल है...' उत्पल दत्त के करियर की सबसे शानदार फिल्मों में से एक है 'गोल माल', जिसका निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था. साल 1979 में रिलीज हुई फिल्म भवानी (उत्पल दत्त) और राम प्रसाद (अमोल पालेकर) नाम के दो किरदारों की कहानी को पर्दे पर उतारती है. भवानी अमीर है, लेकिन उसे ऐसे लड़कों से नफरत है, जो आधुनिक तरीके से और अय्याशी में रहते हैं. इस फिल्म के जरिए दत्त ने दर्शकों को इतना हंसाया कि उन्हें ‘कॉमेडी किंग' कहना ज्यादा न होगा.

वहीं, अमोल पालेकर फिल्म में दोहरी भूमिका में नजर आए थे. फिल्म में उत्पल दत्त के साथ अमोल पालेकर और बिंदिया गोस्वामी भी मुख्य भूमिका में हैं.

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शौकीन:- जवानी उन्हीं के लिए है, जो जवान हैं...अब बारी है उत्पल दत्त की दूसरी फिल्म ‘शौकीन' की, साल 1982 में आई फिल्म का निर्देशन बासु चटर्जी ने किया था. शौकीन तीन ऐसे बुजुर्गों की कहानी है, जिनकी कमजोरी महिलाएं रहती हैं और इसी घेरे में वे खूब हंसाते हैं. फिल्म में उत्पल दत्त के साथ अशोक कुमार, एके हंगल, मिथुन चक्रवर्ती और रति अग्निहोत्री मुख्य भूमिकाओं में हैं.

किसी से ना कहना:- दर्शकों को हंसाने के लिए एक बार फिर से उत्पल दत्त सामने आए और अपने ‘कैलाश पति' के किरदार संग दर्शकों का खूब मनोरंजन किया. ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘किसी से ना कहना' 1983 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में दत्त ने एक ऐसे पिता का किरदार निभाया था, जो बेटे की शादी किसी ऐसी लड़की से करवाना चाहता है, जो अनपढ़ हो और उसे अंग्रेजी न आती हो, लेकिन लड़के (फारुख शेख) को पढ़ी-लिखी लड़की रमोला (दीप्ति नवल) से प्यार हो जाता है. फिल्म में सच-झूठ की आड़ में कई मजेदार घटनाएं घटती हैं.

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'किसी से ना कहना' में उत्पल दत्त के साथ दीप्ति नवल, फारुख शेख सईद जाफरी समेत अन्य कई मंझे हुए कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं.

नरम गरम:- बात उत्पल दत्त और कॉमेडी की हो तो फिर साल 1981 में रिलीज हुई ‘नरम गरम' को कैसे भूला जा सकता है. फिल्म कुसुम (स्वरूप संपत) और उसके पिता विष्णु प्रसाद (एके हंगल) की कहानी है, जो स्थानीय साहूकार से कर्ज न चुका पाने के कारण बेघर हो जाते हैं और उनकी मदद रामप्रसाद (अमोल पालेकर) करता है, जो कुसुम से प्यार करता है.

फिल्म में उत्पल दत्त ने एक बूढ़े जमींदार का किरदार निभाया था. फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग को खूब पसंद किया गया. 'नरम गरम' में उत्पल दत्त के साथ अमोल पालेकर, शत्रुघ्न सिन्हा, स्वरूप संपत, एके हंगल, स्वरूप अग्रवाल समेत कई कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं.

अंगूर :- विलियम शेक्सपियर के नाटक 'ए कॉमेडी ऑफ एरर्स' से प्रेरित फिल्म 'अंगूर' साल 1982 में रिलीज हुई थी, जिसमें उत्पल दत्त ने संजीव कुमार और देवेन वर्मा के साथ खूब हंसाया था. फिल्म में संजीव कुमार और देवेन वर्मा दोहरी भूमिका में रहते हैं और दत्त ने उनके पिता का रोल प्ले किया था. जुड़वा बच्चों की कहानी को दिखाती फिल्म का निर्देशन मशहूर गीतकार गुलजार ने किया था.
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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