Exclusive: द केरल स्टोरी के डायरेक्टर का छलका दर्द, बोले- कोई स्टूडियो मेरी फिल्म लेना नहीं चाहता

इन सबके बीच सुदीप्तो सेन ने खुलासा किया है कि द केरल स्टोरी के हिट होने के बाद भी उनकी फिल्में जल्दी कोई खरीदना नहीं चाहता है.

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Exclusive: द केरल स्टोरी 2 के डायरेक्टर का झलका दर्द

द केरल स्टोरी 2 इन दिनों अपनी कंटेंट की वजह से विवादों में है. फिलहाल केरल उच्च न्यायालय ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी है. इस बीच द केरल स्टोरी के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन ने अपनी नई फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ' की घोषणा भी कर डाली है. गुरुवार को फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया, जो काफी सुर्खियां बटोर रहा है. इन सबके बीच सुदीप्तो सेन ने खुलासा किया है कि द केरल स्टोरी के हिट होने के बाद भी उनकी फिल्में जल्दी कोई खरीदना नहीं चाहता है. सुदीप्तो सेन से पूछा गया कि आपने कहा कि द केरल स्टोरी और चरक जैसी कहानियों से आपका दिल दहल जाता है. पर कभी आपका दिल यह देख कर दहलता है कि बतौर फिल्ममेकर आपको एक तरफ फिल्म बनाकर उसे रिलीज करने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है और दूसरी तरफ रिलीज के लिए चाहे वह सेंसर हो या सिनेमा हॉल हर मोर्चे पर जद्दोजहद करनी पड़ती है? सिनेमा स्क्रीन के लिए भी लड़ाई लड़नी पड़ती है. तो फिल्ममेकर के तौर पर आपको क्या लगता है, क्या अब इस तरह की फिल्म बनाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है, खासकर इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर के लिए?

इस पर उन्होंने जवाब दिया,'पहले से ही इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर के लिए जर्नी आसान नहीं थी. लेकिन अब क्या हो गया है, मेरे जैसे फिल्ममेकर को, या मैं जो अपनी जिंदगी से महसूस कर सकता हूं मैंने द केरल स्टोरी से लगभग साढ़े तीन सौ–चार सौ करोड़ कमाए. तब सबको लगा, मुझे भी लगा कि अब जिंदगी आसान हो जाएगी. अगली फिल्म बनाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. लेकिन जिंदगी और मुश्किल हो गई. विश्वास करिए, कोई ओटीटी, कोई स्टूडियो मेरी फिल्म लेना नहीं चाहता. सोशल रिकॉग्निशन मिला, लोग मिल लेते हैं, हंस कर बात कर लेते हैं, लेकिन फिल्म लेने से कतराते हैं. चरक के लिए भी मैं उसी दौर से गुजरा. लेकिन जयंतीलाल गड़ा जैसे अच्छे इंसान ने यह नहीं सोचा कि क्या मिलेगा, क्या नहीं मिलेगा, यूए मिलेगा या नहीं. उन्होंने कहा, “सुदीप, मुझे फिल्म अच्छी लगी और ऐसी फिल्म हमारे देश में बननी चाहिए.”

सेंसर बोर्ड की तरफ से भी यह बात सामने आई कि इस तरह की फिल्म बनाना देश के लिए एक बड़ी सर्विस है. इसलिए मुझे लगता है कि जर्नी मुश्किल है और रास्ता भी मुश्किल है, लेकिन एक संतोष मिलता है. फिल्म के बाद जब लोगों को अच्छा लगता है, जब तीन साल बाद भी द केरल स्टोरी पर चर्चा होती है या चरक का ट्रेलर देख कर लोग कहते हैं कि रोंगटे खड़े हो गए, तब लगता है कि यह जर्नी सफल है और ऐसी मेहनत आगे भी करने के लिए मैं तैयार हूं.

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