देशभर में आज हनुमान जयंती पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हो रही है और भक्त भगवान हनुमान की आराधना में लीन हैं. इस दौरान मंदिरों और घरों में हनुमान चालीसा गूंज रही है. हालांकि, हनुमान चालीसा केवल इस खास मौके की ही नहीं बल्कि भारतीय घरों में करोड़ों लोगों की दिनचर्या का लंबे समय से अहम हिस्सा बनी हुई है. इसका सबूत है यूट्यूब पर अरबों में व्यूज. हनुमान चालीसा को भारत में सुबह-सुबह सुनने और पढ़ने की परंपरा बेहद पुरानी है.
हर सुबह भक्ति से होती है दिन की शुरुआत
माना जाता है कि इसे सुनने से मन को शांति मिलती है और जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है. यही वजह है कि बच्चे हों या बुजुर्ग, हर वर्ग के लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं. डिजिटल युग में तो हनुमान चालीसा की लोकप्रियता लगातार बढ़ती ही जा रही है. यूट्यूब पर इसे 5 बिलियन (500 करोड़) से ज्यादा बार देखा जा चुका है. यह आंकड़ा बताता है कि भक्ति संगीत के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है और कैसे यह समय के साथ और मजबूत होती जा रही है.
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गुलशन कुमार का योगदान और दर्दनाक अंत
हनुमान चालीसा को घर-घर तक पहुंचाने में गुलशन कुमार का अहम योगदान रहा है. टी-सीरीज के फाउंडर गुलशन कुमार ने भक्ति संगीत को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. हालांकि, उनकी जिंदगी एक दर्दनाक मोड़ पर खत्म हुई. 1997 में उनकी हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इस घटना ने संगीत जगत को गहरा आघात पहुंचाया, लेकिन उनकी बनाई विरासत आज भी जिंदा है.
आस्था और डिजिटल युग का संगम
आज जब देश हनुमान जयंती मना रहा है, तो हनुमान चालीसा केवल एक भजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है. मंदिरों से लेकर मोबाइल स्क्रीन तक, हर जगह इसकी गूंज सुनाई देती है, जो यह साबित करती है कि भक्ति का यह स्वर कभी थमने वाला नहीं है.