वो फिल्म, जिसके फ्लॉप होते ही डिप्रेशन में चले गए थे ऋषि कपूर, 46 साल बाद वही फिल्म बनी कल्ट क्लासिक

46 साल बाद सुभाष घई ने खुलासा किया कि ‘कर्ज’ की शुरुआती असफलता से ऋषि कपूर बुरी तरह टूट गए थे, लेकिन आज वही फिल्म हिंदी सिनेमा की सदाबहार क्लासिक बन चुकी है.

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कर्ज के फ्लॉप होने के बाद डिप्रेशन में चले गए थे ऋषि कपूर

फिल्म निर्माता सुभाष घई ने फिल्म 'कर्ज' के 46 साल पूरे होने पर पुरानी यादें ताजा कीं. जून 1980 को रिलीज हुई इस फिल्म को आज हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है, लेकिन रिलीज के समय इसका सफर बिल्कुल अलग था. सुभाष घई ने खुलासा किया कि जब फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप घोषित हुई थी, तब पूरी टीम बेहद निराश हो गई थी. खासकर दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर इस असफलता से काफी 'डिप्रेस्ड' गए थे. सुभाष घई ने इंस्टाग्राम पर एक खास कोलाज शेयर किया. इसमें फिल्म की सफलता का जश्न मनाती तस्वीरों के साथ 'कर्ज' के सेट की एक पुरानी बिहाइंड द सीन्स फोटो और फिल्म का पोस्टर भी शामिल था. इस तस्वीर में सुभाष घई, ऋषि कपूर और अभिनेत्री टीना मुनीम को शूटिंग के दौरान निर्देश देते हुए नजर आ रहे हैं.

पोस्ट में हुए सुभाष घई ने लिखा, "आज लोग इसे एक शानदार म्यूजिकल शो कहते हैं, लेकिन 27 जून 1980 को रिलीज के समय इसे फ्लॉप शो कहा गया था. हम सभी बहुत निराश थे और खासकर ऋषि कपूर काफी दुखी थे. आज वही फिल्म सदाबहार म्यूजिकल फिल्म के रूप में मनाई जाती है. हम सभी इसके 46 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं और अपने प्रिय दोस्त और महान अभिनेता ऋषि कपूर को याद कर रहे हैं. अब 'कर्ज' जल्द ही ब्रॉडवे शैली के म्यूजिकल स्टेज शो के रूप में भी आने की तैयारी में है."

'कर्ज' का निर्देशन और निर्माण सुभाष घई ने मुक्ता आर्ट्स के बैनर तले किया था. फिल्म में ऋषि कपूर, टीना मुनीम, सिमी ग्रेवाल, राज किरण, प्रेमनाथ, प्राण और दुर्गा खोटे ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं. फिल्म की कहानी 'मोंटी' नाम के एक सफल गायक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अपने पिछले जन्म की रहस्यमयी बातें याद आने लगती हैं. बाद में उसे पता चलता है कि वह अमीर कारोबारी रवि वर्मा का पुनर्जन्म है, जिसकी उसकी पत्नी कामिनी ने संपत्ति के लालच में उसकी हत्या कर दी थी. इसके बाद कहानी न्याय की तलाश और बदले की रोमांचक यात्रा को दिखाती है.

फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसका संगीत भी आज तक लोगों के दिलों में बसा हुआ है. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत और आनंद बख्शी के गीतों ने फिल्म को अमर बना दिया. 'ओम शांति ओम', 'एक हसीना थी', 'दर्द-ए-दिल दर्द-ए-जिगर', 'मैं सोलह बरस की' और 'पैसा ओ पैसा' जैसे गाने आज भी बेहद लोकप्रिय हैं.

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