90 के दशक का वो खूंखार विलेन, जो एक ही शो में बना भगवान राम, श्रीकृष्ण और टीपू सुल्तान

बॉलीवुड के इस खूंखार विलेन ने भगवान राम से लेकर टीपू सुल्तान तक के दमदार रोल निभाए. हर रूप में फैंस ने पसंद किया. 

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बॉलीवुड का खूंखार विलेन बना राम

भारतीय सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो हर किरदार में खुद को पूरी तरह ढाल लेते हैं. सलीम घोष भी उन्हीं चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे. उन्होंने पर्दे पर भगवान राम, भगवान कृष्ण और टीपू सुल्तान जैसे धार्मिक किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. उन्होंने 28 अप्रैल 2022 को दुनिया से अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी दमदार आवाज, गंभीर व्यक्तित्व और शानदार अभिनय आज भी लोगों के बीच ताजा है. सलीम घोष का जन्म 10 जनवरी 1952 को चेन्नई में हुआ था. उनके पिता मुस्लिम थे, जबकि मां ईसाई परिवार से थीं. बचपन से ही उनका झुकाव कला और अभिनय की ओर था. उन्होंने चेन्नई में पढ़ाई पूरी करने के बाद पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट से अभिनय सीखा. उन्होंने अभिनय सीखने के दौरान ही मंच और कैमरे की दुनिया को करीब से समझना शुरू कर दिया था. 

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एक ही सीरियल में बनें भगवान राम, भगवान कृष्ण और टीपू सुल्तान

सलीम घोष ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1978 में फिल्म 'स्वर्ग नरक' से की थी. उन्होंने शुरुआती दौर में छोटे, लेकिन प्रभावशाली किरदार निभाए. बाद में वह 'सारांश', 'मोहन जोशी हाजिर हो!' और 'सरदारी बेगम' जैसी फिल्मों में नजर आए. उनकी अभिनय शैली बाकी कलाकारों से अलग थी. सलीम घोष को सबसे ज्यादा पहचान 'भारत एक खोज' से मिली. इस सीरियल में उन्होंने भगवान राम, भगवान कृष्ण और टीपू सुल्तान जैसे अलग-अलग किरदार निभाए. यह काम आसान नहीं था, क्योंकि तीनों किरदारों की सोच, स्वभाव और व्यक्तित्व पूरी तरह अलग थे. लेकिन, सलीम घोष ने हर भूमिका को इतनी बेहतरीन तरीके से निभाया कि दर्शक उनके अभिनय के कायल हो गए. खास तौर पर टीपू सुल्तान के किरदार में उनका गंभीर अंदाज और मजबूत संवाद लोगों को बहुत पसंद आया. 

खलनायक बन हुए पॉपुलर

उन्होंने फिल्मों में खलनायक और गंभीर भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी. 'कोयला' में उन्होंने नेगेटिव किरदार निभाया. वहीं, 'थिरुदा थिरुदा' और 'वेत्री वीजा' जैसी साउथ फिल्मों में भी उनके अभिनय की तारीफ हुई. वह हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम और अंग्रेजी फिल्मों में भी काम कर चुके थे, अभिनय के अलावा, सलीम घोष मार्शल आर्ट में भी माहिर थे. उन्हें कराटे और ताई-ची जैसी कलाओं का ज्ञान था. वह थिएटर निर्देशक भी रहे और कला की दुनिया से हमेशा जुड़े रहे. 28 अप्रैल 2022 को सलीम घोष का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह 70 वर्ष के थे. उनके निधन की खबर से फिल्म और टीवी जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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