हिंदी फिल्म पड़ोसन 1968 में रिलीज हुई थी, जिसका निर्देशन ज्योति स्वरूप ने किया है. इसका निर्माण महमूद , एनसी सिप्पी ने किया है तथा इसकी पटकथा राजेंद्र कृष्ण ने लिखी है. यह अरुण चौधरी की इसी नाम की लघु कहानी पर आधारित बंगाली फिल्म पशेर बारी (1952) का रीमेक है , जिसमें भानु बंद्योपाध्याय और सबित्री चटर्जी ने एक्ट किया है. यह लघु कहानी एडमंड रोस्टैंड के फ्रांसीसी नाटक सिरानो डी बर्जरैक (1897) से प्रेरित मानी जाती है. फिल्म में सुनील दत्त , सायरा बानू , महमूद और किशोर कुमार ने काम किया है. हालांकि आज हम फिल्म के एक गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जो काफी हिट हुआ था.
फिल्म 'पड़ोसन' का एक मशहूर गाना असल में तीन अलग-अलग गानों को मिलाकर बनाया गया था? हां, हम फिल्म के गाने 'एक चतुर नार' की बात कर रहे हैं, जो भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बेहतरीन गानों में से एक माना जाता है. ट्विटर पर एक थ्रेड में किशोर कुमार और मन्ना डे के इस मजेदार गाने के पीछे की कहानी बहुत अच्छे से बताई गई है. यह गाना टुकड़ों को जोड़कर बनाई गई एक बेहतरीन पहेली जैसा था. 'एक चतुर नार करके श्रृंगार' गाने में दिखाया गया मशहूर मुकाबला आज भी उतना ही मजेदार और मनोरंजक है जितना 50 साल पहले था. 'द पेपरक्लिप' के एक ट्विटर थ्रेड में बताया गया कि आर. डी. बर्मन द्वारा कंपोज किए गए इस क्लासिक गाने को बनाने में किशोर कुमार ने कितनी अहम भूमिका निभाई थी. ट्वीट में लिखा था, "राजेंद्र कृष्ण की बेहतरीन गीतकारी से लेकर बर्मन के सदाबहार संगीत और महमूद, किशोर व सुनील दत्त की मजेदार प्रस्तुति तक, इस गाने में सब कुछ था. फिर भी यह कोई ओरिजिनल रचना नहीं थी, बल्कि किशोर द्वारा अलग-अलग जगहों से लिए गए टुकड़ों को जोड़कर बनाई गई एक बेहतरीन पहेली थी.
इसका आलाप यानी उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत के गाने की शुरुआत, असल में किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार से प्रेरित था. 1941 की फिल्म 'झूला' में लीड रोल निभाने वाले अशोक कुमार ने 'एक चतुर नार करके श्रृंगार' का पहला वर्शन अपनी आवाज में गाया था. इसके 27 साल बाद उनके छोटे भाई ने इस पुराने क्लासिक गाने का एक नया और लंबा वर्शन बनाने का फैसला किया.जब नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं निकला, तो किशोर कुमार ने 1939 में आई जयंत देसाई की फिल्म 'संत तुलसीदास' के गाने 'बन चले राम रघुराई' की एक धुन इसमें जोड़ दी. 'पड़ोसन' फिल्म में इसे 'अरे देखी तेरी चतुराई' वाले हिस्से के तौर पर इस्तेमाल किया गया. 'एक चतुर नार' गाने को प्रेरित करने वाला आखिरी गाना 1948 की फिल्म 'जिद्दी' का लता मंगेशकर का गाना 'चंदा रे जा रे जा रे' था.
इस तरह वह सदाबहार गाना तैयार किया गया जिसे हम आज भी सुनते हैं. सच तो यह है कि किशोर कुमार की परफेक्शन और अपने काम के प्रति समर्पण ने ही उन्हें भारतीय संगीत के इतिहास के सबसे महान और बेहतरीन गायकों में से एक बनाया.