शादी के बाद मां बनी फिर की फिल्मों में एंट्री, 25 साल किया बॉलीवुड पर राज, लेकिन हुआ कुछ ऐसा कि 35 साल लाइमलाइट से दूर रही ये एक्ट्रेस

आज हम जिस एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं कि वह इंटरनेशनल अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय एक्ट्रेस हैं. इनके करियर की एक बड़ी बात ये रही कि आमतौर पर माना जाता था कि शादी के बाद करियर खत्म हो जाता है लेकिन इन्होंने शादी और एक बच्ची की मां बनने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री ली.

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Suchitra Sen: सुचित्रा सेन ने शादी के बाद फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री ली.
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नई दिल्ली:

भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास में कुछ नाम ऐसे भी थे जिन्होंने समय के साथ अपनी चमक को बरकरार रखा. अभिनेत्री सुचित्रा सेन की नाम उन्हीं अदाकाराओं में आता है. उनकी खूबसूरती, जबरदस्त अदाकारी और मजबूत व्यक्तित्व ने उन्हें अमर बना दिया है. सोमवार (6 अप्रैल) को अभिनेत्री की जन्मतिथि है. इस मौके पर बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. अभिनेता ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर अभिनेत्री की खास तस्वीर पोस्ट की. इसके साथ जैकी श्रॉफ ने लिखा, "सुचित्रा सेन जी की जन्मतिथि पर हम उन्हें याद करते हैं."

शादी और बच्चे के बाद ली ग्लैमर इंडस्ट्री में एंट्री

बंगाली सिनेमा से अपने करियर की शुरूआत करने वाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन का असली नाम रोमा दासगुप्ता था. अभिनेत्री ने शादी और एक बच्ची हो जाने के बाद सिनेमा की दुनिया में अपना करियर स्थापित किया था. दरअसल, कम उम्र में ही सुचित्रा की शादी दीबानाथ सेन से हो गई थी. अभिनेत्री को बचपन से ही गानों का काफी शौक था. उनके इस शौक को देखते हुए पति दीबानाथ ने उन्हें फिल्मों में कदम रखने के लिए प्रेरित किया, जिससे उनके भीतर छिपे कलाकार को पहचान मिली.

अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्ड जीतने वाली पहली एक्ट्रेस

सुचित्रा सेन ने अपने करियर की शुरुआत बंगाली सिनेमा से की थी. हालांकि, उनकी पहली फिल्म 'शेष कोथाय' रिलीज नहीं हुई थी लेकिन 'चौत्तोर' दर्शकों के बीच अच्छी प्रसिद्धि दिलाई थी. इसी फिल्म में उनकी जोड़ी उत्तम कुमार के साथ बनी, जो आगे चलकर भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित जोड़ियों में गिनी जाने लगी. दोनों ने साथ में कई फिल्मों में काम किया था. वे 1963 में 'सात पाके बंधा' के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार (मास्को) जीतने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री थीं.

35 साल तक पब्लिक की नजरों से रही दूर

अभिनेत्री ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी कला का जादू बिखेरा था. उन्होंने देवदास, आंधी और बंबई का बाबू जैसी फिल्मों में काम कर हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय की छाप छोड़ी थी. 1972 में पद्म श्री और 2012 में पश्चिम बंगाल सरकार का सर्वोच्च सम्मान 'बंगा बिभूषण' मिला. हालांकि अभिनेत्री ने 1979 में सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूरी बना ली और 35 वर्षों तक किसी के सामने नहीं आईं. बताया जाता है कि सुचित्रा ने रामकृष्ण मिशन जॉइन कर लिया था. इसके बाद उन्होंने स्पिरिचुऐलिटी की राह अपनाई. 17 जनवरी 2014 को कोलकाता में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया था.

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