मां छोड़ गई, पिता का निधन, सौतेली मां ने ठुकराया- फिर सोशल मीडिया पर छा गया जमशेदपुर का 'धूम' पिंटू

सोशल मीडिया पर वायरल पिंटू को आपने रील्स में मस्ती करते देखा होगा लेकिन पर्दे के पीछे की उनकी जिंदगी की कहानी सुनेंगे तो आंखें नम हो जाएंगी.

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पिंटू को लाइक्स नहीं मदद की जरूरत है
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नई दिल्ली:

झारखंड के जमशेदपुर से निकला एक लड़का पिंटू अचानक सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसे सोशल मीडिया पर लोग ‘धूम' के नाम से पहचानते हैं. एक छोटे से वीडियो ने इसे रातों-रात इंटरनेट सेंसेशन बना दिया. पिंटू के वायरल वीडियो की बात करें तो इसमें वह पूरे जोश और कॉन्फिडेंस के साथ ऋतिक रोशन की फिल्म ‘कृष' के गाने की लाइन बोलता है “कृष का गाना सुनेगा… दिल ना दिया, ले बेटा!”.

अनोखे अंदाज, बिना किसी फॉर्मल ट्रेनिंग वाली रॉ आवाज और मासूम कॉन्फिडेंस ने लोगों का दिल जीत लिया. जल्द ही यह वीडियो इंस्टाग्राम, यूट्यूब और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर रील्स, मीम्स और शॉर्ट्स की बाढ़ ला दी. लाखों लोग इसकी नकल करने लगे और ‘धूम' एक घर-घर का नाम बन गया.

इस हंसी-मजाक और वायरल फेम के पीछे पिंटू की जिंदगी संघर्षों से भरी है. बचपन में ही उसके सिर से माता-पिता का साया उठ गया. मां पहले छोड़कर भाग गई, पिता ने दूसरी शादी की. कुछ समय बाद पिता का निधन हो गया और सौतेली मां ने इतना सहारा नहीं दिया. परिवार में चाचा चाची हैं जो हालचाल पूछ लेते हैं.

कूड़ा बीनने का काम करता है पिंटू

पिंटू कूड़ा बीनने और इसी तरह के छोटे-मोटे काम करके गुजारा करता है. जिंदगी की मुश्किलों के बीच भी उसकी आवाज में जो जज्बा है, वही उसे अलग बनाता है. एक वीडियो में उसने अपनी उम्र करीब 32 साल बताई, लेकिन उसके चेहरे, अंदाज और आवाज को देखकर ज्यादातर लोग उसे उससे काफी छोटा समझते हैं, जिससे दर्शक हैरान रह जाते हैं.

लाइक्स से ज्यादा जरूरी है मदद

पिंटू की यह कहानी सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि एक गहरी सच्चाई सामने लाती है कि समाज में कितने छिपे हुए टैलेंट ऐसे हैं, जो रोज मुश्किल हालात से जूझ रहे हैं. सोशल मीडिया ने उन्हें एक पल की शोहरत दी लेकिन असल जरूरत है सच्ची मदद, सम्मान और बेहतर जिंदगी की.

यहां देखें वीडियो

वायरल होने के बाद कुछ लोग उसकी मदद के लिए आगे आए हैं और उसका लुक भी बदला दिख रहा है, लेकिन उसकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई. पिंटू की आवाज हमें याद दिलाती है कि टैलेंट किसी अमीरी-गरीबी का मोहताज नहीं होती, बस उसे पहचानने वाला एक मौका चाहिए.

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