संजीव कुमार बॉलीवुड का जाना माना नाम रहे हैं. उन्होंने शोले, आंधी और अंगूर जैसी आइकॉनिक फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा में छाप छोड़ी. लेकिन उनकी 46 की उम्र में मौत ने इंडस्ट्री को चौंका दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने अपनी उम्र से ज्यादा के रोल क्यों निभाए? सचिन पिलगांवकर, जो शोले फिल्म में संजीव कुमार के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने दिवंगत सुपरस्टार के साथ दोस्ती को याद किया और बताया कि संजीव कुमार ने उनसे एक बार हस्तरेखा विशेषज्ञ की डरावनी भविष्यवाणी का जिक्र किया था कि वे बुढ़ापा देखने के लिए कभी जिंदा नहीं रहेंगे.
संजीव कुमार से मिलने गए थे सचिन पिलगांवकर
बॉलीवुड आज और कल के साथ सचिन पिलगांवकर ने बातचीत में कहा, 'उन्होंने मुझसे कहा, 'एक बार हाथ देखने वाले ने कहा था कि मैं ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रहूंगा या बुढ़ापा नहीं देख पाऊंगा. इसीलिए मैं फिल्मों में ज्यादा उम्र वाले किरदार निभाता हूं, ताकि जिंदगी के उस दौर का अनुभव स्क्रीन पर कर सकूं, जिसे शायद मैं असल जिंदगी में कभी न जी पाऊं.' सचिन ने संजीव कुमार के निधन से एक दिन पहले डबिंग सेशन के दौरान मुलाकात का जिक्र किया. संजीव ने एक्टर को मिलने के लिए अगली सुबह बुलाया. लेकिन सचिन को काम था और दिन में आने का फैसला किया. जब वह संजीव कुमार के घर में पहुंचे तो उनसे कहा गया कि वह ठीक नहीं हैं. लेकिन उसके बाद जो हुआ उसने सचिन का दिल तोड़ दिया.
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संजीव कुमार को बताया दोस्त
सचिन पिलगांवकर ने कहा, “मैं उनसे मिलने उनके घर गया था. मैं उनसे एक दिन पहले मिला था, जब वह डबिंग कर रहे थे. मैंने उससे कहा कि मैं अगले दिन आना चाहता हूं. उन्होंने कहा, ‘सुबह आ जाना.' मैंने कहा, ‘नहीं, मैं दोपहर 2 से 2:30 बजे के बीच आऊंगा.' उनसे पूछा कि क्या मैं थोड़ा जल्दी आ सकता हूं. लेकिन मैंने उन्हें बताया कि मुझे पहले कुछ काम निपटाना है और उसके बाद ही आऊंगा. जब जमनादास जी डॉ. गांधी के साथ आए तो मैंने पूछा कि क्या हुआ. उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें उल्टी हुई थी और वे रात में बहुत देर से यानी सुबह करीब 3 या 4 बजे लौटे थे. मैंने कहा, ‘अगर उनकी तबीयत ठीक नहीं थी तो भी वे इतनी देर तक काम क्यों कर रहे थे? जब मैं उनसे मिलूंगा, तो उन्हें जरूर डांटूंगा.' वे मेरे दोस्त, फिलॉसफर और गाइड थे. ऐसी कोई बात नहीं थी जिस पर हम एक-दूसरे से बात न कर सकें.”
जमीन पर पड़े थे थे संजीव कुमार
आगे उन्होंने कहा, मैंने 30 मिनट तक इंतजार किया. लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि कुछ ठीक नहीं है. डॉक्टर कमरे में थे. जबकि बाहर लोग डरे हुए थे. सचिन ने फैसला किया कि वह खुद चेक करेंगे. तो जब दरवाजा खुला तो उन्होंने देखा कि संजीव कुमार दरवाजे के पास कार्पेट पर गिरे थे. उनका चेहरा नीचे थे और एक हाथ दरवाजे की ओर थे. सचिन ने डॉक्टर को बुलाया और वह चेक करने के लिए अंदर आए. डॉक्टर ने उनसे कहा, संजीव पहले ही मर चुके हैं. इस खबर ने उन्हें चौंका दिया था. संजीव कुमार का 6 नवंबर 1985 को निधन हो गया था.
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