शर्मिला टैगोर की बेटी ने शेयर की पुरानी यादें, बताया मम्मी का कौनसा कोस्टार है उनका फेवरेट

शर्मिला टैगोर की लाडली बेटी ने इंस्टाग्राम पर मम्मी की पुरानी तस्वीरें शेयर करते हुए बताया कि मां के साथ काम कर चुके सभी स्टार्स में उनका फेवरेट स्टार कौन सा था.

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शर्मिला टैगोर की बेटी को याद आए शशि कपूर
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नई दिल्ली:

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान और सोहा अली खान की बहन सबा पटौदी ने शशि कपूर को उनकी जयंती पर याद किया. सबा ने अपने इंस्टाग्राम पर दिवंगत अभिनेता की अपनी मां शर्मिला टैगोर के साथ पुरानी तस्वीरें साझा कीं. उन्होंने इसके साथ ही एक लंबा नोट भी पोस्ट किया. लिखा, "जन्मदिन मुबारक शशि अंकल! मां के सभी कोस्टार में से मेरे पसंदीदा. उन्हें सबसे ज्यादा जानती थी. एक सज्जन व्यक्ति. एक स्टार. एक दयालु आत्मा और अद्भुत इंसान. मुझे आपका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत याद आता है, बिल्कुल अब्बा की तरह. आप दोनों निश्चित रूप से उस विशेषता से जुड़े होंगे. एक लीजेंड."

शशि कपूर हिंदी सिनेमा में कपूर खानदान के पितामह स्वर्गीय पृथ्वीराज कपूर के तीसरे और सबसे छोटे बेटे थे. शशि कपूर ने 1948 में अपने भाई राज कपूर की पहली निर्देशित फिल्म ‘आग' से एक बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और 1961 में यश चोपड़ा की राजनीतिक ड्रामा ‘धर्मपुत्र' में एक वयस्क के रूप में अपनी पहली भूमिका निभाई.

शशि कपूर ने 1965 में दो ब्लॉकबस्टर ‘वक्त' और ‘जब-जब फूल खिले' के साथ खुद को स्थापित किया. इसके बाद उन्हें कुछ हद तक सफलता नहीं मिली. उन्होंने 1974 में उल्लेखनीय वापसी की और उस समय के शीर्ष पांच से छह बड़े सितारों में शामिल हो गए और 1970 के दशक की शुरुआत से 1980 के दशक तक ब्लॉकबस्टर हिंदी फिल्मों में अभिनय किया. इनमें ‘रोटी कपड़ा और मकान', ‘दीवार', ‘चोरी मेरा काम', ‘कभी कभी', ‘फ़कीरा', ‘त्रिशूल', ‘क्रांति' और ‘नमक हलाल' जैसी फिल्में शामिल हैं.

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'जुनून' में एक लापरवाह सरदार, 'कलयुग' में एक व्यवसायी, 'विजेता' में एक सख्त पिता और 'न्यू डेल्ही टाइम्स' में एक ईमानदार पत्रकार की भूमिका के लिए उन्हें आलोचकों की तारीफ मिली. इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला. उन्हें चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है और उन्होंने कई अंग्रेजी भाषा की अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया. भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए 2011 में पद्म भूषण और 2014 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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