दिलीप कुमार को इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहे थे सत्या के भाऊ, ट्रेजेडी किंग ने कहा- ‘इतना थिएटर करने का फायदा क्या है?'

सत्या के भाऊ गोविंद नामदेव जब एक बार ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार को इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहे थे, और अपना थिएटर का एक्सपीरियंस बता रहे थे, लेकिन उनका जवाब सुनकर हैरान रह गए.

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सत्या के भाऊ को दिलीप कुमार दिया था ये गुरु मंत्र
नई दिल्ली:

गोविंद नामदेव बॉलीवुड के वो एक्टर हैं, जिन्होंने अपने फिल्मी करियर में ज्यादातर विलेन के किरदार निभाए हैं. गोविंद नामदेव का फिल्मी करियर काफी संघर्षों से भरा रहा है. उनको शुरुआती दौर में काफी फिल्मों से रिप्लेस भी कर दिया गया था. जहां उन्होंने काफी मेहनत के बाद बॉलीवुड में अपना एक अलग स्थान बनाया. गोविंद नामदेव का जन्म 3 सितंबर 1954 में मध्य प्रदेश के सागर में हुआ था. उन्होंने अभी तक 115 से ज्यादा फिल्मों में अपना दमदार अभिनय कर लोगों के बीच में अपनी खास पहचान बनाई है. हाल ही में गोविंद ने NDTV से बात की और अपने गुरु दिलीप कुमार के बारे में कुछ ऐसी बातें कही हैं, जो दिल छूने वाली हैं.

एक्टर ने दिलीप कुमार को माना अपना गुरु

एक्टर गोविंद नामदेव ने दिलीप कुमार के साथ पुराने दिनों को याद किया और कहा कि दिलीप कुमार जी ने एक्टिंग को लेकर मेरा नजरिया बदल दिया. दिलीप कुमार जी ने मुझे ऐसी चीज बताई. जिनको मैं अपनी एक्टिंग में डालता हूं. आज उसी का नतीजा है कि मैं एक सक्सेसफुल एक्टर रहा हूं. मैं दिलीप साहब को अपना गुरु मानता हूं. उनको देखकर मैंने एक्टिंग सीखी है. उनकी बात ने मेरी गहराई बढ़ा दी है. जैसा की सब जानते हैं कि मैं सुभाष घई की एक फिल्म कर रहा था, जिसमें बाद मुझे उस फिल्म से हटा दिया गया था. उस वक्त मेरी दिलीप कुमार जी से मुलाकात हुई थी. जब मेरी उनसे पहली मुलाकात हुई तब मैंने उनसे कहा था कि मैं आपको अपना गुरु मानता रहा हूं. आपका काम देखकर ही मैं मैच्योर हुआ हूं. आपका काम देखकर ही मैं मुंबई आया हूं. कभी-कभी मैं फिल्म के सेट पर चला जाता था. जहां उनका एक अलग से रूम होता था, एक दिन में इजाजत लेकर उनके रूम के अंदर चला गया था.'

गोविंदा नामदेन ने आगे बताया,  'मैंने उनसे कहा कि मैं आपसे थोड़ी सी चर्चा करना चाहता हूं, उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा. मैंने उनको बताया कि मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से 3 साल का कोर्स किया है और मैंने 12 साल थिएटर भी किया है, इसके बाद मैं यहां आया हूं. जिस लेवल का थिएटर मैंने किया है, जैसे मैंने जर्मनी में इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल में शोज किए. इसके अलावा मैंने लंदन, पोलैंड में भी शोज किए हैं. उनको काफी समय तक इंप्रेस करने की कोशिश करता रहा. उन्होंने कहा कि इतना ज्यादा थिएटर करने का फायदा क्या है? अगर आप कैमरे के सामने उसी अंदाज में एक्टिंग करने लगते हैं. जो आप नेचुरल एक्टिंग करते हैं वही सही है. उन्होने आगे बताया कि थिएटर बैकग्राउंड से काफी लोग यहां आते हैं. जब उनको मौका मिलता है तो वो थिएटर की एक्टिंग करते हैं और फेल हो जाते हैं. उन्होंने मुझे कैमरे के सामने नेचुरल एक्टिंग करने की सलाह दी.'

एक्टर का वर्कफ्रंट

अगर गोविंद नामदेव के वर्कफ्रंट की बात करें तो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शोला और शबनम से की थी. जिसमें उन्होंने भ्रष्ट पुलिस वाले का किरदार निभाया था. जिसके बाद उनको माधुरी दीक्षित के साथ 'प्रेम ग्रंथ' में सबसे ज्यादा नोटिस किया गया था. फिर 1998 में आई 'सत्या', 'विरासत', 'सरफरोश', 'गदर एक प्रेम कथा' जैसी तमाम बड़ी फिल्में की. इसके अलावा उनको अक्षय कुमार के साथ आई फिल्म ओएमजी से भी नोटिस किया गया था. जब उन्होंने अपनी एक्टिंग से आज के एक्टर्स को पीछे कर दिया. दीपक नामदेव काफी टेलिविजन शोज भी कर चुके हैं. जिसमें 'आहट', 'महायज्ञ', 'आशीर्वाद', 'अभियान' जैसे तमाम सीरियल्स का नाम शामिल है.

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