संजीव कुमार की 55 साल पुरानी फिल्म, ईरान में हुई शूटिंग, तेहरान के एक्टर के छोटे भाई बने शोले के 'ठाकुर', बॉक्स ऑफिस पर छाई

1971 में रिलीज हुई एक फिल्म भारत और ईरान के सिनेमाई रिश्तों की खास मिसाल है. ईरान में शूट हुई इस फिल्म में संजीव कुमार ने तेहरान के मशहूर अभिनेता मोहम्मद अली फरदीन के छोटे भाई का किरदार निभाया था. वहीदा रहमान भी इसमें नजर आईं.

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ईरान की फेवरेट रही है ये संजीव कुमार की ये 55 साल पुरानी फिल्म
नई दिल्ली:

आज दुनिया की नजरें ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हैं. लेकिन इन राजनीतिक हलचलों के बीच भारत और ईरान के रिश्तों की एक दिलचस्प सिनेमाई कहानी भी छिपी है. ये कहानी है करीब 55 साल पुरानी. आपने कई बार फिल्मों में यूरोप और अमेरिका के चकाचौंध से भरे शहर देखे होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईरान की खूबसूरत वादियां भी हिंदी फिल्मों का हिस्सा बन चुकी हैं. शोले के ठाकुर ने एक ऐसी ही फिल्म में काम किया था जिसकी शूटिंग भी काफी हद तक ईरान में हुई थी और ईरानी मूल के स्टार भी फिल्म में दिखाई दिए थे. 

जब ईरान की धरती पर बनी थी हिंदी फिल्म ‘सुबह-ओ-शाम'

साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म ‘सुबह-ओ-शाम' उस दौर की एक अनोखी फिल्म थी, जिसने भारत और ईरान के सिनेमा को एक साथ जोड़ दिया. इंडो-ईरानियन निर्देशक तापी चाणक्य ने इस फिल्म की शूटिंग ईरान की कई शानदार लोकेशनों पर की थी. उस समय विदेशी लोकेशनों पर शूटिंग करना बेहद खास माना जाता था, इसलिए ये फिल्म चर्चा में आ गई. फिल्म में वहीदा रहमान और संजीव कुमार जैसे बड़े बॉलीवुड सितारों के साथ ईरान के सुपरस्टार मोहम्मद अली फरदीन भी नजर आए. कहानी में दिलचस्प मोड़ ये था कि संजीव कुमार ने फरदीन के छोटे भाई की भूमिका निभाई थी. फिल्म में सिमिन गफ्फारी, लोरेटा, इरीन और अजर जैसे कई ईरानी कलाकार भी शामिल थे. इस तरह ये फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं रही, बल्कि दोनों देशों की कला और कलाकारों के मिलन की मिसाल बन गई.

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गानों और कहानी ने जीता दिल

फिल्म की कहानी जितनी दिलचस्प थी. उसका म्यूजिक भी उतना ही शानदार था. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत और आनंद बख्शी के गीतों ने फिल्म को और खास बना दिया. वहीं लता मंगेशकर, किशोर कुमार, आशा भोसले और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गज गायकों ने अपनी आवाज से इन गानों को यादगार बना दिया. मोहम्मद रफी के गाए गाने जैसे ‘छोड़ मुझे पीने दे', ‘साकी की जरूरी है' और ‘तेरी मेरी नजर लड़ गई' उस दौर में बेहद पसंद किए गए थे. दिलचस्प बात ये भी है कि इस फिल्म को ईरान में ‘होमाये सादात' नाम से रिलीज किया गया था और वहां भी इसे खूब पसंद किया गया. फिल्म की कामयाबी के बाद कई भारतीय फिल्ममेकर्स ने ईरान में शूटिंग करने में दिलचस्पी दिखाई. 

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