सैफ अली खान ने साल 2012 में करीना कपूर से शादी की और इसके पहले या बाद में कभी भी अपनी पहली शादी के बारे में बात करने से परहेज नहीं किया. फिर चाहे बात उनके साथ की हो, तलाक की या इंटरफेथ मैरिज को लेकर उनके विचार. सैफ और अमृता के बीच 13 साल का फर्क था. फिल्म सेट पर आंखें मिली, प्यार हुआ और फिर दोनों ने शादी कर ली. एक तरफ जहां शर्मिला टैगोर ने मंसूर अली खान पटौदी से शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपनाया था वहीं सैफ ने कभी अमृता सिंह को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेशर नहीं दिया.
सैफ ने बताया, “डिंगी (अमृता सिंह) को ना तो इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव डाला गया और ना ही उसे इस धर्म को मानने के लिए कहा गया. शुरू से ही हमारा सिद्धांत था कि हर कोई अपना धर्म मानने के लिए आजाद है. जब सारा और इब्राहिम छोटे थे, तब भी मैंने इसी सिद्धांत का सख्ती से पालन किया.”
उन्होंने यह भी याद किया कि जब अमृता गुरुद्वारे में प्रार्थना के लिए जाती थीं, तो वह बच्चों की देखभाल करते थे. तलाक के बाद सैफ को बच्चों के धर्म को लेकर कुछ चिंता हुई थी, क्योंकि अमृता की कस्टडी में थे. लेकिन उन्हें अमृता पर पूरा भरोसा था कि वह बच्चों को किसी धर्म की तरफ प्रभावित नहीं करेंगी.
अबू जानी और संदीप खोसला बने थे शादी के गवाह
सैफ और अमृता की शादी काफी जल्दबाजी में हुई थी. डिजाइनर अबू जानी और संदीप खोसला, जो निकाहनामा पर गवाह बने थे, ने बताया कि दोनों ने अचानक फैसला लिया. अमृता थोड़ी हिचकिचा रही थीं लेकिन सैफ तैयार थे. दोनों कुछ महीनों से साथ रह रहे थे.
शादी में मौलवी के साथ-साथ एक सिख ग्रंथी भी मौजूद था. मौलवी ने अमृता से कहा कि नाम ‘अ' से शुरू होना चाहिए, तो पंडित ने सजेस्ट किया ‘अजीजा'. अमृता ने जल्दी में जो कपड़े फिट हुए, वही पहने और अपनी मां से मिले गहने पहनकर तैयार हुईं. सैफ ने बंदगला पहना था. यह एक तरह की ‘भागकर शादी' जैसे हालात थे क्योंकि परिवारों को पहले पता नहीं था.