Rose Day 2026 Shayari: गुलाब की पंखुड़ियों जैसी शायरी जिसकी खुशबू में कैद हो जाएगा माशूक का दिल और दिमाग

Rose Day Shayari: दिल और गुलाब का रिश्ता कुछ अनोखा है. प्यार की बात हो और लाल गुलाब का जिक्र ना आए हो ही नहीं सकता. वैलेटाइन वीक के पहले डे रोज डे पर आपके लिए गुलाबों पर शायरी.

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Rose Day Shayari: वैलेंटाइन वीक के रोज डे पर शायरी

Happy Rose Day 2026 Shayari: हर साल 14 फरवरी को वैलेंटाइन्स डे बड़े उत्साह से मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 7 फरवरी से वैलेंटाइन वीक के रूप में होती है, जो प्रेमियों के लिए एक खास सप्ताह बन जाता है. पहला दिन यानी 7 फरवरी को रोज डे मनाया जाता है. इस दिन गुलाब का फूल प्यार के इजहार का सबसे मजबूत और खूबसूरत प्रतीक माना जाता है. चाहे बॉलीवुड की रोमांटिक फिल्में हों या असल जिंदगी की कहानियां, गुलाब हमेशा सबसे ज्यादा डिमांड में रहता है. टूटे दिल को जोड़ने हो या पहली बार इश्क कबूल करने हो, गुलाब का जादू हर बार काम करता है. बॉलीवुड में भी ऐसे कई हिट गाने बने हैं, जिनमें से एक मशहूर है, 'मिले न फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली.' रोज डे के मौके पर उर्दू के बड़े शायरों की इश्किया शायरी भी खास तौर पर याद की जाती है, जहां गुलाब के फूल के साथ उसके कांटों का जिक्र बार-बार आता है. ये शेर प्यार की मिठास के साथ दर्द और कुर्बानी को भी बयां करते हैं.

वैलेंटाइन कैलेंडर | Valentine's Week 2026 calendar

  • 7 फरवरी: रोज डे  
  • 8 फरवरी: प्रपोज डे  
  • 9 फरवरी: चॉकलेट डे  
  • 10 फरवरी: टेडी डे  
  • 11 फरवरी: प्रॉमिस डे  
  • 12 फरवरी: हग डे  
  • 13 फरवरी: किस डे  
  • 14 फरवरी: वैलेंटाइन्स डे

रोज डे पर शायरी | Rose Day Shayari

उसे किसी से मोहब्बत न थी मगर उस ने
गुलाब तोड़ के दुनिया को शक में डाल दिया
दिलावर अली आज़र

आज भी शायद कोई फूलों का तोहफा भेज दे
तितलियां मंडला रही हैं कांच के गुल-दान पर
शकेब जलाली

महक रही है ज़मीं चांदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है
बशीर बद्र

पता था मुझ को मुलाक़ात ग़ैर-मुमकिन है
सो तेरा ध्यान किया और गुलाब चूम लिया
शारिक़ कैफ़ी

किसी के लम्स की तासीर है कि बरसों बाद
मेरी किताबों में अब भी गुलाब जागते हैं
अख़लाक़ बन्दवी

दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
इफ़्तिख़ार राग़िब

नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
बशीर बद्र

चौदहवीं का चांद फूलों की महक ठंडी हवा
रात उस काफ़िर अदा की ऐसी याद आई कि बस
रईस रामपुरी

उस को हंसता देख के फूल थे हैरत में
वो हंसती थी फूलों की हैरानी पर
अम्मार यासिर मिगसी

फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
साजिद प्रेमी

मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँ
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
अफ़ज़ल इलाहाबादी

हसरत-ए-मौसम-ए-गुलाब हूँ मैं
सच न हो पाएगा वो ख़्वाब हूँ मैं
नीना सहर
 

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