बॉलीवुड की सबसे ग्लैमरस और रहस्यमयी अदाकारा रेखा की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही दर्दभरी रही है. करोड़ों की दौलत और शोहरत से पहले रेखा ने अभाव, ताने और पहचान के संघर्ष में बचपन बिताया. बहुत कम लोग जानते हैं कि रेखा, जिनका असली नाम भानुरेखा गणेशन है, तमिल सुपरस्टार जेमिनी गणेशन की नाजायज संतान थीं. पिता के होते हुए भी पिता का साया न मिलना, समाज की फुसफुसाहटें और मजबूरी में कम उम्र में फिल्मों में आना- रेखा की जिंदगी आसान नहीं रही.
नाजायज पहचान के साथ बीता बचपन
रेखा का जन्म जेमिनी गणेशन और पुष्पवल्ली के रिश्ते से हुआ था, जब जेमिनी पहले से शादीशुदा थे. रेखा बचपन और किशोरावस्था में 'नाजायज बेटी' के तौर पर जानी जाती थीं. पिता ने कभी उन्हें सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किया. हालात ऐसे थे कि बाद में जब रेखा स्टार बनीं, तब जेमिनी गणेशन को लोग 'रेखा के पिता' के नाम से पहचानने लगे.
पिता होते हुए भी पिता नहीं मिले
रेखा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने कभी पिता को घर में महसूस ही नहीं किया. उन्होंने बताया कि जब किसी चीज का अनुभव ही न हो, तो उसकी कमी का एहसास भी नहीं होता. स्कूल में पढ़ते समय रेखा अपने सौतेली बहन को पिता के साथ देखती थीं, लेकिन जेमिनी गणेशन ने कभी उन्हें पहचानने की कोशिश नहीं की.
मां के कर्ज ने बनाया एक्ट्रेस
रेखा महज 14 साल की थीं, जब उन्हें पढ़ाई छोड़कर फिल्मों में काम करने के लिए मजबूर किया गया. वजह थी मां पर चढ़ा भारी कर्ज. दक्षिण भारतीय सिनेमा में पिता के प्रभाव के कारण रेखा को ज्यादा मौके नहीं मिले, जिसके बाद उन्हें मुंबई आना पड़ा. यहां भी उन्हें संघर्ष, ताने और गॉसिप का सामना करना पड़ा.
शादी, आशीर्वाद और अधूरा रिश्ता
1990 में रेखा ने मुकेश अग्रवाल से शादी की. यही वो मौका था, जब पहली बार जेमिनी गणेशन ने उन्हें आशीर्वाद दिया. लेकिन उसी साल मुकेश की आत्महत्या के बाद रेखा की जिंदगी फिर अकेली हो गई. 1994 में जब रेखा ने अपने पिता को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया, तब पहली बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन्हें स्वीकार किया.
पिता के अंतिम सफर से दूरी
2005 में जेमिनी गणेशन के निधन पर रेखा उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं. उन्होंने कहा कि उनके लिए पिता कल्पना में हमेशा जीवित रहे और वही उनके लिए सबसे खूबसूरत सच था.