राजपाल यादव दोबारा बनाएंगे फिल्म, अता पता लापता फ्लॉप हुई तो क्या, अपकमिंग प्रोजेक्ट पर दिया ये हिंट- EXCLUSIVE

Rajpal Yadav: राजपाल यादव एक बार फिल्म बनाकर नुकसान करवा बैठे लेकिन उन्होंने इस हार को अंत नहीं माना. एनडीटीवी से खास बातचीत में उन्होंने अपनी फ्यूचर प्लानिंग बताई.

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राजपाल यादव फिर बनाएंगे फिल्म!
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नई दिल्ली:

Rajpal Yadav News: बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव ने 2012 में अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा था. ये फैसला उनकी जिंदगी में एक बड़ा तूफान लेकर आया और उन्हें जेल तक के दर्शन करा दिए. लेकिन फिल्म मेकिंग को लेकर अभी राजपाल यादव का हौसला पस्त नहीं हुआ है. कॉमीडियन ने एनडीटीवी से खास बातचीत में बताया कि उनकी प्रोडक्शन कम्पनी राजपाल नौरंग यादव वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के पास पाइपलाइन में फिल्में, बड़ी फिल्में, छोटी फिल्में वेब सीरीज सभी तरह के प्रोजेक्ट हैं और आने वाले पांच सालों में इनके नतीजे भी देखने को मिलेंगे. इसका मतलब साफ है कि राजपाल यादव पर्दे पर एक्टिव होने के साथ साथ पर्दे के पीछे भी काम करते रहेंगे. 

क्या थी अता पता लापता की कहानी ?

राजपाल यादव की पहली फिल्म उनकी पत्नी राधा यादव ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. यह एक म्यूजिकल सैटायर फिल्म थी, जिसमें राजपाल यादव ने लीड रोल निभाया था. फिल्म की कहानी माधव चतुर्वेदी नाम के शख्स की थी, जो पुलिस में चोरी की शिकायत दर्ज कराता है. उसका पूरा घर ही गायब हो गया है! जांच में शक होता है कि खुद माधव ने इंश्योरेंस क्लेम के लिए यह सब साजिश रची. मीडिया का दबाव पड़ने पर पुलिस जांच आगे बढ़ाती है. फिल्म में असरानी, ओम पुरी, आशुतोष राणा, मनोज जोशी, गोविंद नामदेव, दारा सिंह जैसे दिग्गज कलाकार शामिल थे.

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2 नवंबर 2012 को रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर महज 38 लाख रुपये की कमाई की जबकि इसे बनाने में करीब 11 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. 

अता पता लापता बनाने के लिए लिया था कर्जा

राजपाल यादव ने फिल्म बनाने के लिए 2010 में दिल्ली की एक कंपनी ‘मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड' से करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था. कुछ रिपोर्ट्स में इसे निवेश बताया गया, जहां फाइनेंसर अपने पोते को लॉन्च करने की चाहत रखता था.

फिल्म के फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव लोन चुकाने में नाकाम रहे. पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए, लेकिन वे बाउंस हो गए. ब्याज, पेनल्टी और कानूनी खर्चों के साथ रकम बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये हो गई. मामला चेक बाउंस (नीचे धारा 138) के तहत कोर्ट पहुंचा. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने खुद को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया. जेल में कुछ दिन गुजारने के बाद, ढाई करोड़ रुपये जमा करने पर उन्हें अंतरिम जमानत मिली (18 मार्च 2026 तक). 

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