राजेश खन्ना-अमिताभ बच्चन की वो 54 साल पुरानी फिल्म जिसे बनने में लगे 28 दिन, 30 लाख में कमाए 98 लाख

54 साल पहले एक फिल्म रिलीज हुई थी जिसे सिर्फ 28 दिन में शूट कर लिया गया था. थिएटर्स में इस फिल्म ने ना सिर्फ खूब पैसे कमाए बल्कि दर्शकों की आंखों को भी नम कर दिया.

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54 साल पुरानी इस फिल्म ने दर्शकों को रोने पर कर दिया मजबूर
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नई दिल्ली:

बॉलीवुड में अकसर कई ऐसी फिल्में आईं जिनके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था कि ये एकदम कल्ट फिल्म बन जाएंगी. ऐसी ही एक फिल्म 1971 में रिलीज हुई. इस फिल्म ने ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर खूब कामयाबी हासिल की बल्कि इसने थिएटर में लोगों को रोने पर भी मजबूर कर दिया. हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की क्लासिक फिल्म ‘आनंद' की जो आज भी दर्शकों के दिलों में रची-बसी है. 1971 में रिलीज हुई इस फिल्म में पहली बार राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन एक साथ नजर आए थे. आनंद की कहानी दो दोस्तों की है और इसे हृषिकेश मुखर्जी ने डायरेक्ट किया था. हृषिकेश मुखर्जी ऐसे डायरेक्टर थे जो जिंदगी की छोटी-छोटी बातों को बहुत ही सादगी के साथ बड़ी बना देते थे. 54 साल पुरानी उनकी फिल्म आनंद भी कुछ ऐसी ही है. 

आनंद फिल्म में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन नजर आए. फिल्म को सिर्फ 28 दिनों में शूट कर लिया गया था और इसका बजट लगभग 30 लाख रुपये था जबकि इसने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया और लगभग 98 लाख रुपये की कमाई की. थिएटर्स में राजेश खन्ना की की मौत का सीन देखकर दर्शक इतने भावुक हो गए कि रोने लगे.

देखें आनंद फुल मूवी

आनंद फिल्म का निर्देशन हृषिकेश मुखर्जी ने किया था, जिन्होंने इसे एक साधारण लेकिन दिल को छू लेने वाली कहानी में तब्दील कर दिया. स्क्रीनप्ले में गुलजार, बिमल दत्त और डी.एन. मुखर्जी का योगदान था, जबकि संवाद गुलजार ने लिखे. कहानी एक टर्मिनल कैंसर पेशेंट आनंद शर्मा (राजेश खन्ना) की है, जो मौत के इरादे से जूझते हुए भी जिंदगी को पूरे उत्साह से जीता है. उसका दोस्त डॉ. भास्कर बनर्जी (अमिताभ बच्चन) आनंद की सकारात्मकता का कायल हो जाता है. फिल्म खत्म होते-होते दर्शक आनंद के साथ हंसते-हंसते रो पड़ते हैं. फिल्म का प्रसिद्ध डायलॉग ‘जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं' छह शब्दों में बड़ी बात कह जाता है. 

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आनंद फिल्म का संगीत सलील चौधरी ने दिया, जिसमें गुलजार और योगेश के बोल थे. गाने जैसे ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए', ‘नैना बरसे रिमझिम रिमझिम' और ‘जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम' आज भी खूब सुने जाते हैं. शुरुआत में यह मॉडेस्ट सक्सेस रही, लेकिन राजेश खन्ना की 17 लगातार हिट फिल्मों की श्रृंखला का हिस्सा बनकर कल्ट स्टेटस हासिल कर लिया. 1971 में राजेश खन्ना ने 10 फिल्में दीं, जिनमें से कई टॉप ग्रॉसर्स में शामिल रहीं. 

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