1993 में रिलीज हुई तिरंगा ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा कमाल किया था, जिसे आज भी याद किया जाता है. महज 2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 12 करोड़ रुपये की कमाई कर उस दौर में बड़ी ब्लॉकबस्टर का दर्जा हासिल किया था. 29 जनवरी 1993 को रिलीज हुई इस फिल्म के लिए सिनेमाघरों के बाहर लंबी कतारें लग जाती थीं और कई हफ्तों तक ‘हाउसफुल' के बोर्ड लगे रहे. डायरेक्टर मेहुल कुमार की इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत थी दो दमदार कलाकारों राज कुमार और नाना पाटेकर की टक्कर.
एक तरफ ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह के किरदार में राज कुमार का रॉयल अंदाज था, तो दूसरी तरफ इंस्पेक्टर शिवाजी राव वागले के रोल में नाना पाटेकर का उग्र तेवर. दोनों की स्क्रीन प्रेजेंस ने फिल्म को अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया. फिल्म करीब 168 मिनट लंबी थी, लेकिन इसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि दर्शकों का ध्यान एक पल के लिए भी नहीं भटका. राज कुमार का शांत लेकिन प्रभावशाली अभिनय और उनके डायलॉग्स ने फिल्म को क्लासिक बना दिया. वहीं, नाना पाटेकर ने अपने गुस्से, ऊर्जा और बेहतरीन डायलॉग डिलीवरी से हर सीन में जान डाल दी.
खास बात यह भी रही कि नाना पाटेकर शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे, लेकिन जब दोनों दिग्गज कलाकार साथ आए तो उनकी केमिस्ट्री ने कमाल कर दिया. एक ओर सधे हुए अंदाज में राज कुमार का किरदार था, तो दूसरी ओर बेकाबू और आक्रामक पुलिस ऑफिसर के रूप में नाना- यह टकराव दर्शकों के लिए बेहद रोमांचक साबित हुआ.
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फिल्म में विलेन प्रलयनाथ गेंदास्वामी का किरदार भी काफी चर्चित रहा, जिसे दीपक शिर्के ने निभाया था. उनका अलग अंदाज और संवाद आज भी लोगों को याद हैं. देशभक्ति, एक्शन और दमदार डायलॉग्स से सजी ‘तिरंगा' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि 90 के दशक की उन यादगार फिल्मों में से एक है जिसने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी. यही वजह है कि 33 साल बाद भी इसकी चर्चा उतनी ही जोरों से होती है.