63 साल पुराना राजकुमार और माला सिन्हा का ये रोमांटिक गाना सुनने पर आएगी भजन वाली फीलिंग, मुकेश ने दी थी आवाज

राजकुमार और माला सिन्हा पर फिल्माया गया 1963 का ये प्रेम गीत अपनी खूबसूरत धुन और दिल छू लेने वाले बोलों की वजह से आज भी खास है. आनंद बख्शी के लिखे गीत को मुकेश ने अपनी आवाज दी थी.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
माला सिन्हा और राज कुमार का गीत आज भी जीत लेता है दिल
Social Media
नई दिल्ली:

पुराने हिंदी सिनेमा में प्यार जताने का अंदाज ही कुछ और था. उस दौर के गीतों में मोहब्बत की बातें भी इतनी खूबसूरती और सादगी से कही जाती थीं कि कई बार प्रेम गीत सुनते हुए भजन जैसा सुकून महसूस होता है. ऐसा ही एक गीत है जिसमें चांद, फूल, सवेरा और अंधेरे जैसे शब्दों के जरिए महबूब की खूबसूरती को बयां किया गया है. गीतकार ने महबूब की तारीफ तो की है लेकिन उसका अंदाज कुछ ऐसा है जिसमें रुमानियत के साथ रूहानी सुकून भी महसूस होता है. ऊपर से मुकेश की आवाज और कल्याणजी-आनंदजी की धुन इस एहसास को और गहरा कर देती है. राजकुमार और माला सिन्हा पर फिल्माया गया 1963 का यह गीत है ‘चांद आहें भरेगा, फूल दिल थाम लेंगे'. 

चांद और फूलों से की खूबसूरती की बात

गीत की शुरुआत ही बेहद दिलचस्प है ‘चांद आहें भरेगा, फूल दिल थाम लेंगे, हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे'. आनंद बख्शी ने यहां महबूब की खूबसूरती को सीधे-सीधे बयान करने के बजाय चांद और फूलों का सहारा लिया है. मतलब इतना खूबसूरत चेहरा कि उसकी तारीफ के आगे चांद भी फीका लगे और फूल भी जैसे ठहरकर उसे देखने लगें. यही वजह है कि गीत सुनते हुए इसमें सिर्फ रोमांस नहीं, एक तरह की श्रद्धा और ठहराव भी महसूस होता है.

माला सिन्हा की खूबसूरती पर लिखे कमाल के बोल

गीत आगे बढ़ता है तो खूबसूरती की तारीफ और भी दिलचस्प हो जाती है. ‘ऐसा चेहरा है तेरा जैसे रोशन सवेरा, जिस जगह तू नहीं है उस जगह है अंधेरा'. इसके बाद आंखों को नाजुक कलियों, बातों को मिश्री और होठों को गंगा के किनारे जैसा बताया गया है. उस दौर के गीतों की खासियत यही थी कि खूबसूरती की तारीफ में भी एक नजाकत और मर्यादा बनी रहती थी. गीतकार ने माला सिन्हा के किरदार की खूबसूरती को सिर्फ चेहरे तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे पूरे माहौल से जोड़ दिया.

मुकेश की आवाज ने बढ़ाया असर

इस गीत को मुकेश ने अपनी आवाज दी थी. उनकी आवाज में मौजूद ठहराव इस गीत के रोमांटिक एहसास को और गहरा कर देता है. गीत में न तो बहुत तेज संगीत है और न ही आवाज पर किसी तरह का जोर. सब कुछ बेहद सहज तरीके से आगे बढ़ता है. यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है. इसे सुनते हुए लगता है कि कोई अपने सामने बैठे शख्स की खूबसूरती को बेहद शांति से देख रहा है और उसके बारे में कहता जा रहा है.

Advertisement

कल्याणजी-आनंदजी का संगीत भी खास

गीत के संगीत की जिम्मेदारी कल्याणजी-आनंदजी की थी. संगीत में वही ठहराव सुनाई देता है, जो इसके बोलों में नजर आता है. धुन, मुकेश की आवाज और आनंद बख्शी के शब्द एक-दूसरे के साथ इस तरह चलते हैं कि गीत को सुनना सिर्फ एक रोमांटिक गाना सुनने जैसा नहीं लगता. 1963 की ‘फूल बने अंगारे' में माला सिन्हा ने उषा और राजकुमार ने कैप्टन राजेश का किरदार निभाया था. दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन उषा अपने परिवार की जिम्मेदारियों के कारण शादी का फैसला टाल देती है.

यह भी पढ़ें: 60 साल पुराना मुमताज का गाना, लाल साड़ी पहन झरने पर किया डांस, इसके 19 साल बाद आई थीं मंदाकिनी

Advertisement
Featured Video Of The Day
PM Modi के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर सियासत गरम, पी. चिदंबरम पर BJP का पलटवार
Topics mentioned in this article
Phool Bane Angaare Song
Raaj Kumar
Mala Sinha
Mukesh
Mala Sinha Facts