बिना तिलक, बिना बंदूक के इस फिल्म में डाकू बन गए थे प्राण, एक पेपर में लगी फोटो देख राज कपूर को आया था आइडिया

प्राण साहब ने विलेन के किरदार को सिनेमा के उस दौर में दमदार बनाया जब मेकअप और टेक्नॉलॉजी के नाम पर सीमित ही बंदोबस्त हो पाते थे.

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इस फिल्म में डाकू बन गए थे प्राण
नई दिल्ली:

प्राण का नाम ही काफी है एक ऐसे एक्टर को याद करने के लिए जिसने लंबे समय तक फिल्मों में विलेन का किरदार अदा किया. जिसकी आंखों से ही इतने खूंखार भाव झलकते थे कि लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते थे. प्राण साहब ने विलेन के किरदार को सिनेमा के उस दौर में दमदार बनाया जब मेकअप और टेक्नॉलॉजी के नाम पर सीमित ही बंदोबस्त हो पाते थे. उस दौर में अपने अलग अलग हाव भाव और अंदाज से प्राण एक विलेन को दूसरे विलेन से बहुत आसानी से अलग बना देते थे. अपनी एक फिल्म में डकैत के किरदार को भी उन्होंने एक नया गेटअप दिया था. जिसका आइडिया एक न्यूज पेपर से मिला था.

इस फिल्म में बने डाकू

प्राण ने बहुत सी फिल्मों में डाकू का किरदार भी अदा किया. आमतौर पर फिल्मी डाकू की बात होती है तो ऐसी छवि दिमाग में आती है जिसके माथे पर तिलक हो. हट्टे कट्टे से उस शख्स के कंधे पर और कमर पर कारतूस वाली बेल्ट होगी. और,  हाथ में होगी बंदूक लेकिन एक फिल्म के लिए प्राण ने डाकू की इस इमेज को बिलकुल अलग तरह से पेश किया. इस फिल्म का नाम था जिस देश में गंगा बहती है. इस फिल्म में राज कपूर और पद्मिनी लीड रोल में थे. 1960 में रिलीज हुई इस फिल्म के गाने भी खासे हिट हुए थे.

ऐसा था प्राण का गेटअप

इंस्टाग्राम हैंडल ओल्ड इज गोल्ड फिल्म्स ने प्राण का एक पुराना इंटरव्यू शेयर किया है. इस इंटरव्यू में प्राण बता रहे हैं कि उनका गेटअप बाकी डाकुओं से अलग क्यों था. प्राण के मुताबिकक उनका किरदार राका नाम के डाकू का था. राका जोधपुरी पेंट, प्लेन जैकेट, बिना पॉलिश किए हुए बूट्स पहना करता था. उसके पास कारतूस वाला कोई बेल्ट भी नहीं होता था. पूरी फिल्म में वो बहुत स्लो पेस में डायलोग बोला करता था. उसे गुस्सा भी पूरी फिल्म में एक ही बार आय़ा था. प्राण के मुताबिक एक अखबार की कटिंग देख राज कपूर ने उनका रोल प्लान किया था.

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