प्रकाश राज ने कई बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है जैसे सिंघम (2011), दबंग 2 (2012), और वांटेड (2009). इसके अलावा वे साउथ में ही एक्टिव रहे हैं. नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले इस एक्टर का मानना है कि मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा अपनी जड़ों से दूर हो गया है और बहुत "फेक" और "पैसे पर फोकस" हो गया है. प्रकाश केरल लिटरेचर फेस्टिवल (KLF) के चल रहे नौवें एडिशन में बोल रहे थे जहां उन्होंने हिंदी सिनेमा पर अपनी राय शेयर की.
प्रकाश राज ने क्या कहा
न्यूज एजेंसी PTI की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक प्रकाश ने कहा, “आज के समय में, मुझे लगता है कि मलयालम और तमिल सिनेमा बहुत मजबूत फिल्में बना रहे हैं. दूसरी तरफ हिंदी सिनेमा अपनी जड़ों से दूर हो गया है. सब कुछ सुंदर, शानदार, प्लास्टिक जैसा दिखता है, जैसा कि आप मैडम तुसाद म्यूजियम में देखते हैं. हमारे (दक्षिण) पास अभी भी कहानियां हैं बताने के लिए, तमिल के नए युवा डायरेक्टर दलित मुद्दों पर बात कर रहे हैं और इससे बहुत उम्मीद मिलती है.”
‘मुझे लगता है कि इंडस्ट्री ने दर्शकों से अपना जुड़ाव खो दिया है'
उन्होंने आगे कहा, "मल्टीप्लेक्स के बाद, बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री ने सिर्फ मल्टीप्लेक्स के लिए फिल्में बनाना शुरू कर दिया. वे उस पेज 3 कल्चर में चले गए और इसके साथ ही ग्रामीण राजस्थान और बिहार से उनका जुड़ाव खत्म हो गया. आज यह सब पैसे और दिखावे के बारे में है. रील्स, पेज 3 कवरेज, और जोरदार सेल्फ-प्रमोशन. इस प्रोसेस में मुझे लगता है कि इंडस्ट्री ने दर्शकों से अपना जुड़ाव खो दिया है."
प्रकाश राज आखिरी बार हिंदी फिल्म 'तेरे इश्क में' में दिखे थे, जहां उन्होंने धनुष के पिता का किरदार निभाया था. वह अगली बार पॉलिटिकल एक्शन ड्रामा जना नायकन में नजर आएंगे. यह एक्टर के तौर पर विजय की आखिरी रिलीज होगी. यह फिल्म इस महीने की शुरुआत में रिलीज होने वाली थी लेकिन सेंसर की दिक्कतों के कारण इसमें देरी हुई. नई रिलीज डेट अभी अनाउंस नहीं की गई है.