मकबूल, गुलाल और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाने वाले पीयूष मिश्रा ने अपने बारे में कुछ ऐसे खुलासे किए, जिसे जानने के बाद फैंस हैरान रह गए. उम्दा एक्टर और सिंगर के तौर पर जाने जाने वाले को पीयूष मिश्रा एक वामपंथी कार्यकर्ता थे. उनके मित्र एन के शर्मा ने उन्हें 1989 में साम्यवाद से परिचित कराया था. 20 वर्षों तक पूरी तरह से वामपंथी कार्यकर्ता रहे. पीयूष मिश्रा एक बेकाक एक्टर हैं. उन्होंने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ की मुश्किलों के बारे में हमेशा ही खुलकर बात की. हाल ही में उन्होंने बताया कि शराब की लत ने उनकी जिंदगी पर कैसा असर डाला.
उन्होंने शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में कहा, "शराब की लत एक जानलेवा बीमारी है. इसका शिकार जो बी व्यक्ति होता है, उसे भी इस बात का एहसास नहीं होता कि वह इस बीमारी से जूझ रहा है. यहां तक कि मेडिकल साइंस के पास भी शराब की लत का कोई इलाज नहीं है. एक ऐसा वक्त आता है जब, आप चाहे, या ना चाहें, आपको शराब की ज़रूरत महसूस होती है. आपका शरीर इसकी जोरदार तलब करता है. मैंने खुद इस बात को महसूस किया है."
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शराब की लत के शिकार थे एक्टर
'मकबूल' फिल्म एक्टर ने बताया कि उन्होंने कभी भी शराब पीकर अभिनय नहीं किया. न ही कभी शराब के नशे में सेट पर गए. शराब ने उनके दिमाग पर किस तरह असर डाला, इस बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "जब मैं 'हुस्ना' गा रहा था, तब मेरा दिमाग शराब के नशे में था. जब मैं 'गुलाल' पर काम कर रहा था, तब भी मेरा दिमाग शराब के नशे में था. हालांकि उस समय मैंने शराब नहीं पीया था. मैं शराब इसलिए पीता था क्योंकि मेरे शरीर को इसकी जोरदार तलब होती थी. आप उस तलब को दबा नहीं सकते."
नशे में औरतों से अभद्रता
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शराब की लत की वजह से उन्होंने दूसरों के साथ तकलीफदेह बर्ताव किया. "शराब पीने के बाद मैंने कई ऐसी चीजें कीं, जिनके बारे में बाद में मुझे यह एहसास हुआ. मुझे लगा कि मैं यह नहीं हूं. शराब के नशे में मैंने अपनी मां से कई कड़वी बातें कहीं. 63 साल के इस एक्टर ने आगे बताया, "मैंने कई महिलाओं के साथ अभद्रता की. मैंने फोन पर उन्हें कई बार गलत और अश्लील बातें कहीं, अगली सुबह मुझे वे बातें याद भी नहीं रहती थीं. बाद में जब मैं इस बारे में पूछता, तो वे कहतीं, 'सर, आपने कल रात फोन पर ये सब कहा था. कितनी गंदी बातें.' मैं कहता, 'मैंने ऐसा कहा ही नहीं होगा,' लेकिन वे जोर देकर कहतीं कि मैंने कहा था. उस समय मेरा खुद पर कोई काबू नहीं था. मैं ऐसी चीजें कर रहा था जो मैं करना नहीं चाहता था. ऐसी चीजें, जिनके बारे में मुझे लगता था कि मैं कभी भी होशो-हवास में नहीं कर सकता."
उन्होंने बताया, हालांकि प्रोफशनली लोग मुझसे डरते थे क्योंकि मैं इस तरह से पेश आता था. इसका असर मेरे काम पर भी पड़ने लगा. लोग कहने लगे कि मेरे साथ काम करना बहुत मुश्किल है. यह सोच आज भी बनी हुई है कि मेरा मिजाज बहुत तेज है. मेरे साथ काम करना आसान नहीं है."
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ऐसे बदले एक्टर
साल 2009 में पीयूष मिश्रा को ब्रेन स्ट्रोक आया, जिसका असर उनके शरीर के दाहिने हिस्से पर पड़ा. इसी समय उन्होंने अपनी बुरी आदतों पर काबू पाने के लिए विपश्यना का अभ्यास शुरू किया. "मैं एक असामाजिक इंसान बन गया था. मेरे काम ने ही मुझे बचाया. वरना, मैंने जिस तरह का बर्ताव किया था, उसे देखते हुए तो लोग मुझे पीट-पीटकर मार ही डालते."