पंचायत का ये एक्टर, 20 किलोमीटर साइकिल चलाकर बेचता था कपास, आज पूरे देश में छाया, PM मोदी से की थी मुलाकात

अशोक पाठक की कहानी उन कलाकारों में से एक है, जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड और गॉडफादर के एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री अपनी अलग पहचान बनाई है. कभी साइकिल पर कपास बेचने वाला यह लड़का आज भारतीय OTT के सबसे फेमस चेहरों में से एक बन चुका है.

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प्राइव वीडियो की नंबर वन सीरीज है पंचायत, जिसमें बिनोद नजर आता है
नई दिल्ली:

कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो एक्टर का नाम भले लोगों को याद न रहने दें, लेकिन चेहरा हमेशा के लिए पहचान बना देता है. 'पंचायत' का बिनोद ऐसा ही किरदार है. आज लोग उसे देखते ही अनायास कह उठते हैं, 'देख रहा है न बिनोद.' लेकिन इस मुस्कुराते चेहरे के पीछे संघर्ष के कई ऐसे साल छिपे हैं, जब वो रोज 20 किलोमीटर साइकिल चलाकर कपास बेचता था, छोटी फिल्मों और विज्ञापनों में काम ढूंढता फिरता था और बार बार ये सुनता था कि उसके पास 'हीरो वाला चेहरा' नहीं है. यही लड़का आज देशभर में 'बिनोद' के नाम से पहचाना जाता है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे मुलाकात की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. हम बात कर रहे हैं 'पंचायत' में बिनोद का किरदार निभाने वाले अभिनेता अशोक पाठक की.

कभी साइकिल पर बेचते थे कपास

अशोक पाठक का बचपन आर्थिक तंगी में बीता. उनके पिता दिहाड़ी मजदूर थे और परिवार की मदद के लिए अशोक रोज करीब 20 किलोमीटर साइकिल चलाकर कपास बेचने जाते थे. दिनभर की मेहनत के बदले उन्हें करीब 100 रुपए मिलते थे. संघर्ष भरे इस दौर के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और कॉलेज पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया.

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थिएटर ने बदल दी जिंदगी

कॉलेज में पहली बार अशोक का परिचय थिएटर से हुआ. मंच पर अभिनय करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि यही उनका असली जुनून है. एक यूथ थिएटर फेस्टिवल में 'बेस्ट एक्टर' का पुरस्कार जीतने के बाद परिवार ने भी उनके सपने का साथ दिया. एक नाटक से मिले 40 हजार रुपए लेकर वह मुंबई पहुंच गए, लेकिन असली परीक्षा तो अब शुरू हुई थी. मुंबई में अशोक ने सालों तक संघर्ष किया. उन्हें छोटी फिल्मों, विज्ञापनों और छोटे किरदारों में काम मिलता रहा. कई बार उन्हें यह कहकर भी मना कर दिया गया कि उनका चेहरा पारंपरिक बॉलीवुड हीरो जैसा नहीं है. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय लगातार ऑडिशन दिए और अभिनय सीखते रहे.

'बिनोद' ने बदल दी पहचान

अशोक पाठक को 'पंचायत' में बिनोद का किरदार मिला, तो शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यह छोटी सी भूमिका इतनी बड़ी पहचान बन जाएगी. 'देख रहे हो बिनोद' सिर्फ एक डायलॉग नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया का पसंदीदा मीम बन गया. आज लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और 'बिनोद' के नाम से ज्यादा पहचानते हैं. अशोक पाठक का सफर सिर्फ 'पंचायत' तक सीमित नहीं रहा. 2024 में उनकी फिल्म 'सिस्टर मिडनाइट' का प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जिससे उनके करियर को अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली.

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