'पाकीजा' अभिनेत्री ने 100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम, आखिरी दिनों में बेटे ने की मारपीट, दर्द भरी थी इस एक्ट्रेस की दास्तां

पर्दे पर सफलता हासिल करने वाली गीता कपूर की पर्सनल लाइफ काफी मुश्किलों से भरी रही. उन्होंने अपने बेटे पर मारपीट  के आरोप लगाए थे. जीवन के अंतिम सालों में वह वृद्धाश्रम में रहीं.

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100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम, लेकिन आखिरी दिनों में बेटे का करती रहीं इंतजार
नई दिल्ली:

आाज हम आपको बॉलीवुड की एक ऐसी एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी एक्टिंग से सभी को मोह लिया. हम बात कर रहे हैं गीता कपूर की. गीता कपूर ने अपने फिल्मी करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था. हालांकि, उन्हें सबसे ज्यादा पहचान 'पाकीजा' में निभाए गए अपने किरदार से मिली. इस क्लासिक फिल्म में उन्होंने राज कुमार की दूसरी पत्नी की भूमिका निभाई थी, जबकि फिल्म में मुख्य भूमिका मीना कुमारी ने निभाई थी. आज भी इस फिल्म को हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिना जाता है.

गीता कपूर का अंतिम समय रहा दर्दनाक

गीता कपूर का फिल्मी करियर तो शानदार रहा लेकिन उनका अंतिम समय काफी दर्दनाक रहा. अपने जीवन के आखिरी समय में गीता कपूर वृद्धाश्रम में रह रही थीं. गीता कपूर के बेटे राजा फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं और कोरियोग्राफर के तौर पर काम करते हैं, जबकि उनकी बेटी पूजा एयर होस्टेस हैं. बताया जाता है कि कुछ साल पहले उनके बेटे ने उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ दिया था और उसके बाद उनसे मिलने भी नहीं आया.

बेटे पर लगाए थे प्रताड़ना के आरोप

एक इंटरव्यू में गीता कपूर ने बेटे पर मारपीट के आरोप भी लगाए थे. उनके मुताबिक, बेटे की गलत लाइफस्टाइल का विरोध करने पर वह अक्सर उनके साथ मारपीट करता था. उन्होंने यह भी कहा था कि कई बार उन्हें समय पर खाना तक नहीं दिया जाता था. कभी चार-चार दिन बाद खाना मिलता तो कभी उन्हें कई दिनों तक कमरे में बंद रखा जाता था.

वृद्धाश्रम में बीते जिंदगी के आखिरी दिन
गीता कपूर का कहना था कि वह वृद्धाश्रम में रहने के लिए तैयार नहीं थीं. उनका आरोप था कि इसी वजह से बेटे ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया. उन्होंने दावा किया था कि उन्हें जानबूझकर भूखा रखा गया जिससे उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई. जब उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन इसके बाद उनका बेटा उन्हें वहीं छोड़कर चला गया.

गीता कपूर के कठिन समय में फिल्म निर्माता अशोक पंडित और रमेश तौरानी ने उनका साथ दिया. दोनों ने उनके इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी निभाई और अंतिम समय तक उनका पूरा ध्यान रखा. इसके बावजूद अपने बच्चों से मिलने की अधूरी इच्छा उनके मन में बनी रही.

अंतिम समय तक बच्चों का करती रहीं इंतजार

साल 2019 में गीता कपूर का निधन हो गया. एक इंटरव्यू के दौरान अशोक पंडित ने बताया था कि गीता कपूर अपने जीवन के अंतिम चार महीनों में लगभग कुछ भी ठोस भोजन नहीं कर पा रही थीं. उनकी सेहत इतनी खराब हो चुकी थी कि उन्हें केवल तरल आहार के सहारे रखा जा रहा था. इसके बावजूद उन्हें एक उम्मीद थी कि उनका बेटा एक दिन उन्हें लेने आएगा और वृद्धाश्रम से वापस अपने घर ले जाएगा. लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी.

बेटा नहीं पहुंचा अंतिम दर्शन के लिए

गीता कपूर के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को कुछ समय के लिए Cooper Hospital में रखा गया, ताकि यदि उनके बच्चे अंतिम दर्शन के लिए आना चाहें तो उन्हें यह अवसर मिल सके. हालांकि उनका बेटा वहां नहीं पहुंचा. बाद में उनकी बेटी और बहनों ने मिलकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं.






 

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