बॉलीवुड का वो दौर जब पहलाज निहलानी से हाथ मिलाने को तरसते थे लोग, जिसको छू लेते थे बदल जाती थी किस्मत

Pahlaj Nihalani Death: पहलाज निहलानी का निधन हो गया है. वह 76 वर्ष के थे. फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट और उन्हें करीब से जानने वाले अतुल मोहन ने NDTV से उनसे जुड़ी कई दिल छू लेने वाली बातें बताई हैं.

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Pahlaj Nihalani Death News: जानें किस तरह की शख्सियत थे पहलाज निहलानी
NDTV
नई दिल्ली:

Pahlaj Nihalani Death News: फिल्म प्रोड्यूसर और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 4 जून को सुबह निधन हो गया. उनकी उम्र 76 वर्ष थी. पहलाज निहालानी का अंतिम संस्कार तीन बजे सांता क्रूज क्रिमेटोरियम में होगा. फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट और पहलाज निहलानी को काफी करीब से जानने वाले अतुल मोहन ने NDTV को बताया, '15 दिन पहले ही उनसे फोन पर बात हुई थी. उस समय उन्होंने बताया था कि वो 3-4 स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं. वह अपने प्रोडक्शन हाउस को रिवाइव करना चाह रहे थे. यही नही, वह काफी एनर्जेटिक लोगों में से थे.'

जग्गा जासूस कुछ ही घंटों में दिलाया सेंसर सर्टिफिकेट

अतुल ने उस समय का भी एक किस्सा याद किया पहलाज जब निहलानी जब सेंसर बोर्ड़ के चेयरमैन हुआ करते थे. उन्होंने कहा, 'वह इस बात की परवाह करते थे कि कोई भी फिल्म को डिले ना हो. इसलिए वह हमेशा एक्टिव रहते थे. ऐसा ही एक किस्सा मुझे याद आता है जब जग्गा जासूस शुक्रवार को रिलीज होनी थी. लेकिन फिल्म का कुछ काम होने की वजह ये बुधवार को सर्टिफिकेशन के लिए आई. पहलाजजी ने पूरी फिल्म देखी और उसी दिन इसे सेंसर सर्टिफिकेट जारी भी किया.'

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यही नहीं पहलाज निहलानी 1980 और 1990 के दशक के में बैक टू बैक हिट फिल्में दी थीं. यही नहीं, जिस फिल्म के प्रोडक्शन में भी वो हाथ डाल देते थे वो भी हिट हो जाती थी. इसी पर अतुल मोहन ने बताया, 'उस समय ये कहा जाता था कि पहलाजजी जिससे हाथ मिला लें, उसकी किस्मत बदल जाती है. इस तरह का उनका ऑरा था.' अतुल मोहन ने उन्हें इंडस्ट्री का ट्रू लीडर बताया और कहा कि उन्होंने प्रोड्यूसर्स के हकों के लिए खूब लड़ाई लड़ी और उन्हें सम्मान दिलाया.

पहलाज निहलानी की फिल्मोग्राफी

पहलाज निहलानी ने 1982 में फिल्म प्रोडक्शन की शुरुआत की और 80-90 के दशक में सफल प्रोड्यूसर के रूप में पहचान भी बना ली. उनकी डेब्यू फिल्म हाथकड़ी (1982) में संजय दत्त और रेखा थे. इसके बाद इल्जाम (1986) आई, जिसमें गोविंदा को पहली बार हीरो बनने का मौका मिला. इसने गोविंदा को स्टार बना दिया. शोला और शबनम (1992) गोविंदा और दिव्या भारती के साथ सुपरहिट रही. इसके अगले साल आँखें (1993) ने गोविंदा के स्टारडम को बुलंदियों पर पहुंचा दिया.

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अंदाज (1994) करिश्मा कपूर और अनिल कपूर के साथ सफल रही, जबकि दिल तेरा दिवाना (1996) गोविंदा और माधुरी दीक्षित के साथ आई. इनके अलावा उनकी अन्य महत्वपूर्ण फिल्मों में आंधी-तूफान (1985), आग ही आग (1987), पाप की दुनिया (1988), मिट्टी और सोना (1989), आग का गोला (1989) और भाई भाई (1997) शामिल हैं.

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