प्रसिद्ध संगीतकार नदीम सैफी के लिए संगीत कभी केवल मनोरंजन नहीं रहा. यह हमेशा भावना, पहचान और जुड़ाव का माध्यम रहा है. और यह बात उनके कालजयी देशभक्ति गीत 'आई लव माय इंडिया' में सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो प्रतिष्ठित फिल्म परदेस का हिस्सा था. हाल ही में इस गीत की विरासत को याद करते हुए नदीम सैफी ने साझा किया कि जब यह रचना तैयार की गई थी, तब इसका उद्देश्य केवल फिल्म तक सीमित नहीं था. यह राष्ट्र के प्रति एक भावपूर्ण समर्पण था. भारत की संस्कृति, मूल्यों और आत्मा के प्रति प्रेम की एक संगीतात्मक अभिव्यक्ति.
आज भी जगाता है वही जज्बा
रिलीज के दशकों बाद भी यह गीत श्रोताओं की कई पीढ़ियों के भीतर वही गर्व और भावनाएं जगाता है. सैफी के अनुसार इसकी स्थायी लोकप्रियता का कारण इसकी सच्चाई है. इसे किसी व्यावसायिक सोच से नहीं, बल्कि देश और देशवासियों के प्रति एक ईमानदार श्रद्धांजलि के रूप में बनाया गया था. उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके नेतृत्व ने भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है.
सैफी के अनुसार दुनिया भर में भारतीय विरासत का सम्मान होते देखना उसी भावना को मजबूत करता है जिसने वर्षों पहले इस गीत को जन्म दिया था. हाल ही में बच्चों द्वारा इस गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति ने उन्हें सबसे अधिक भावुक किया. उनके लिए यह एक सशक्त संदेश था कि देशभक्ति समय से परे है. यह तब जीवित रहती है जब नई पीढियां इसे उसी गर्व और प्रेम के साथ अपनाती हैं. आज 'आई लव माय इंडिया' केवल एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान का एक स्थायी प्रतीक बन चुका है. एक ऐसी धुन जो दिलों को जोड़ती है, गर्व जगाती है और भारत की आत्मा का उत्सव मनाती रहती है.