'बेटा' के लिए माधुरी दीक्षित नहीं थी फर्स्ट चॉयस, सबने कहा फ्लॉप एक्ट्रेस, रिलीज के बाद फिल्म बनी ब्लॉकबस्टर, माधुरी 'धक धक गर्ल'

3 अप्रैल को 34 साल पहले एक फिल्म रिलीज हुई थी. इस फिल्म का नाम है 'बेटा' जिसके लिए माधुरी दीक्षित फर्स्ट चॉयस नहीं थी, तो फिर कौन.

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बेटी के लिए पहली पसंद नहीँ थीं माधुरी दीक्षित
नई दिल्ली:

3 अप्रैल को 34 साल पहले एक फिल्म रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा दिया था और फिल्म की हीरोइन जिससे शुरू में सब कन्नी काट रहे थे, वही इसकी असली ताकत बनी. हम यहां बात कर रहे हैं फिल्म बेटा की. 3 अप्रैल 1992 को जब इंद्र कुमार की फिल्म बेटा रिलीज हुई, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यह साधारण-सी लगने वाली फैमिली ड्रामा बॉलीवुड का सबसे बड़ा ब्लॉकबस्टर बन जाएगी. फिल्म ने ना सिर्फ साल 1992 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि माधुरी दीक्षित को 'धक धक गर्ल' का परमानेंट टाइटल भी दिला दिया. दिलचस्प बात यह है कि माधुरी इस रोल की पहली पसंद नहीं थीं.

बेटा की कहानी

फिल्म बेटा की कहानी राजा (अनिल कपूर) और सरस्वती (माधुरी दीक्षित) के इर्द-गिर्द घूमती है. राजा अपनी मां (अरुणा ईरानी) के कहने पर शादी करता है, लेकिन उसकी पत्नी सरस्वती घर की सास-बहू की जंग में फंस जाती है. सास की क्रूरता, बहू की चुप्पी और आखिरकार बहू का विद्रोह, यह सब मिलकर एक जोरदार मेलोड्रामा बनाता है. बेटा 1987 की तमिल फिल्म इंगा चिन्ना रासा की ऑफिशल रीमेक थी. इसके राइटर-डायरेक्टर के भाग्यराज थे.

रिलीज डेट और कमर्शियल सफलता

फिल्म 3 अप्रैल 1992 को थिएटर्स में रिलीज हुई. उस समय अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित का जोड़ी पहले से ही तेजाब और दिल जैसी हिट फिल्मों से चर्चा में थी, लेकिन बेटा ने दोनों को नई ऊंचाई दी. रिलीज के बाद फिल्म ने जबरदस्त कमाई की. भारत में इसका नेट कलेक्शन लगभग 11.5 करोड़ और ग्रॉस कलेक्शन 23.5 करोड़ के आसपास बताया जाता है. 1992 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. 

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माधुरी नहीं थीं फर्स्ट चॉइस

फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह है कि माधुरी दीक्षित इस रोल की पहली चॉइस नहीं थीं. डायरेक्टर इंद्र कुमार की पहली पसंद श्रीदेवी थीं. अनिल कपूर खुद श्रीदेवी के साथ काम करना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि इतना पावरफुल रोल सिर्फ श्रीदेवी ही निभा सकती हैं. लेकिन श्रीदेवी ने फिल्म ठुकरा दी. कारण था, वे नए डायरेक्टर इंद्र कुमार के साथ काम नहीं करना चाहती थीं. 

श्रीदेवी के इनकार के बाद इंद्र कुमार ने माधुरी दीक्षित को साइन किया, क्योंकि वे दिल फिल्म में उनके साथ काम कर चुके थे. दिलचस्प बात यह कि दिल अभी रिलीज नहीं हुई थी, इसलिए माधुरी को उस समय 'फ्लॉप एक्टर' माना जा रहा था. अनिल कपूर भी माधुरी की कास्टिंग से खुश नहीं थे. उन्हें फिल्म का माइनस पॉइंट कहा गया.

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लेकिन किस्मत ने खेल कर दिखाया. दिल रिलीज होते ही सुपरहिट हो गई और माधुरी की स्टार पावर बढ़ गई. बेटा में माधुरी ने सरस्वती का रोल इतनी ताकत और भावुकता से निभाया कि दर्शक उनकी दीवाने हो गए. खासकर आइकॉनिक सॉन्ग 'धक धक करने लगा' ने तो पूरा देश हिला दिया. इस गाने में माधुरी का डांस देखकर उन्हें 'धक धक गर्ल' का टाइटल मिल गया, जो आज भी उनके नाम के साथ जुड़ा हुआ है.

बेटा से जुड़ी खास बातें

फिल्म का संगीत आनंद-मिलिंद ने दिया था. 'धक धक करने लगा' और 'कोयल सी तेरी बोली' जैसे गाने सुपरहिट रहे. अरुणा ईरानी ने सास का रोल इतना जबरदस्त निभाया कि उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला. फिल्म को 38वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में 9 नामांकन मिले और 5 अवॉर्ड जीते, बेस्ट एक्टर (अनिल कपूर), बेस्ट एक्ट्रेस (माधुरी दीक्षित), बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस (अरुणा ईरानी), धक धक करने लगा के लिए बेस्ट कोरियोग्राफर (सरोज खान) और धक धक करने लगा के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर (अनुराधा पौडवाल).

बेटा ने साबित कर दिया कि सही कहानी, दमदार परफॉर्मेंस और कैची म्यूजिक के साथ स्टार पावर से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. माधुरी दीक्षित, जिन्हें शुरू में 'माइनस पॉइंट' माना जा रहा था, फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन गईं. यह फिल्म माधुरी दीक्षित के करियर का टर्निंग पॉइंट भी साबित हुई.

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