बॉलीवुड के कई गाने ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं. ऐसा ही एक गाना है शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘कोयला' का ‘सांसों की माला'. 1997 में रिलीज हुआ यह गाना आज भी अपनी धुन और बोलों की वजह से खास है. गाने को कविता कृष्णमूर्ति ने आवाज दी थी, जबकि राजेश रोशन ने संगीत दिया और इंदीवर ने इसके बोल लिखे थे. हालांकि, इस रचना का इतिहास फिल्मी गाने से काफी पुराना है. इसे लंबे समय से मीराबाई की भक्ति परंपरा से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन इसकी रचना को लेकर अलग-अलग दावे भी मिलते हैं.
1979 में ऋषि कपूर की शादी में गूंजा था
‘सांसों की माला' को नुसरत फतेह अली खान ने अपने अंदाज में गाकर बेहद लोकप्रिय बनाया. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 1979 में भारत की अपनी पहली यात्रा के दौरान नुसरत फतेह अली खान ने ऋषि कपूर और नीतू कपूर की शादी से जुड़े एक कार्यक्रम में इसे गाया था. बाद में यह कलाम उनकी पहचान का हिस्सा बन गया.
दिलचस्प बात यह है कि ‘सांसों की माला' को सिर्फ मीराबाई की रचना मान लेना पूरी तरह सही नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुसार, इसके बोल तुफैल होशियारपुरी की रचना से भी जोड़े गए हैं और बाद में इसे मीराबाई की भक्ति परंपरा से जोड़कर देखा गया. यही वजह है कि इस गाने की कहानी संगीत प्रेमियों के लिए और भी दिलचस्प हो जाती है.
‘कोयला' में शाहरुख-माधुरी पर हुआ शूट
करीब 18 साल बाद इस रचना को बॉलीवुड ने नए अंदाज में पेश किया. 1997 में रिलीज हुई राकेश रोशन की फिल्म ‘कोयला' में इसे शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया. फिल्म में अमरीश पुरी भी अहम भूमिका में थे. गाने को कविता कृष्णमूर्ति ने गाया और राजेश रोशन ने इसे फिल्म के हिसाब से बनाया. इसके बोल इंदीवर ने लिखे थे. गाने के बोलों में प्रेम और समर्पण का भाव दिखाई देता है. ‘सांसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम' में प्रेमी के नाम को अपनी सांसों से जोड़ने की बात कही गई है. यही सूफी और भक्ति रंग इस गाने को बाकी आम रोमांटिक गानों से अलग बनाता है.
29 साल बाद भी लोगों को याद है गाना
‘कोयला' 18 अप्रैल 1997 को रिलीज हुई थी और इसके साथ ही ‘सांसों की माला' भी दर्शकों तक पहुंचा. फिल्म के रिलीज होने के करीब 29 साल बाद भी यह गाना 90s के यादगार बॉलीवुड गानों में शामिल है. इसकी खासियत सिर्फ शाहरुख और माधुरी की स्क्रीन मौजूदगी नहीं, बल्कि पुराने सूफी-भक्ति रंग को बॉलीवुड संगीत में नए अंदाज में पेश करना भी है.
आज भी जब ‘सांसों की माला' बजता है तो लोगों को 90s का दौर याद आ जाता है. एक तरफ नुसरत फतेह अली खान की मशहूर प्रस्तुति की विरासत है, तो दूसरी तरफ ‘कोयला' में कविता कृष्णमूर्ति की आवाज और शाहरुख-माधुरी की जोड़ी. यही वजह है कि यह गाना तीन दशक के करीब समय बीतने के बाद भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.