हिंदी सिनेमा के खूबसूरत चेहरों की बात हो तो मधुबाला के नाम और उनके जिक्र के बिना ये चर्चा पूरी हो ही नहीं सकती. मधुबाला उन हस्तियों, उस खूबसूरत चेहरों में से एक हैं जिनसी मासूमियत दोबारा नहीं दिखी. खुद आप ही बताए क्या आज तक किसी चेहरे में मधुबाला की एक झलक तक देख पाए हैं. उन्होंने बहुत ही कम उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया इसके चलते फैन्स को उनकी कम ही फिल्में देखने को मिलीं. इनमें से एक ऐसी भी थी जो कभी थियेटर्स का मुंह ना देख सकी.
साल 1960 के करीब ‘चालाक' नाम से एक फिल्म शुरू हुई. इसमें मधुबाला के साथ राज कपूर लीड रोल में थे. इस फिल्म को डायरेक्ट कर रहे थे जे.के.नंदा. मधुबाला इस प्रोजेक्ट को लेकर बहुत एक्साइटेड थीं और इसे पूरा करना चाहती थीं. शूटिंग अच्छी चल रही थी और करीब दस रील्स शूट हो चुकी थीं.
Photo Credit: madhubala
अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. उन्हें जन्म से दिल की बीमारी थी यही उनके लिए मुश्किल बन गई. एक बार तो वे सेट पर ही बेहोश हो गईं. डॉक्टरों ने सख्त आराम की सलाह दी. इसके बाद छह साल तक वे घर पर ही रहीं. फिल्म की रीलें सेट पर धूल खाती रहीं. 1966 में मधुबाला ने फिर से शूटिंग शुरू करने की कोशिश की. बीमारी के बावजूद वे सेट पर पहुंचीं, लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया. दोबारा बेहोश होने के बाद काम बंद हो गया. फिल्म अधूरी रह गई.
यह भी पढ़ें: 24 साल पुराना शाहरुख खान का गाना, अटल बिहारी वाजपयी ने लिखे थे बोल, जगजीत सिंह और अमिताभ बच्चन ने मिलकर दी आवाज
23 फरवरी 1969 को महज छत्तीस साल की उम्र में मधुबाला का निधन हो गया. ‘चालाक' कभी पूरी नहीं हो सकी और रिलीज भी नहीं हुई. इस फिल्म के कुछ गाने बाद में लोगों तक पहुंचे. किशोर कुमार इन्हें अपने कार्यक्रमों में गाते थे. ‘दिल का नजराना ले ओ दिलदार ले' और ‘अरे जवानी बड़ी तूफानी' जैसे गीतों में किशोर कुमार व आशा भोसले की आवाज थी. सुमन कल्याणपुर और आशा भोसले ने दूसरे गीत भी गाए थे. मधुबाला की यह अधूरी फिल्म उनके संघर्ष और अधूरे सपनों की याद दिलाती है. उनकी खूबसूरती और टैलेंट हमेशा बॉलीवुड के इतिहास में दर्ज रहेगी.