मधुबाला की 10 खूबसूरत तस्वीरें, वैलेंटाइंस डे पर हुआ जन्म, लेकिन सच्चे प्यार के लिए ताउम्र तरसीं एक्ट्रेस

मधुबाला की खूबसूरती को देखकर लोग उन्हें ‘वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा’ कहते थे, लेकिन उनकी जिंदगी किसी दर्दभरी कहानी से कम नहीं रही. बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाली इस अदाकारा ने कम उम्र में स्टारडम तो पा लिया, मगर सच्चा सुकून कभी नहीं मिला.

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Madhubala 10 Photos: खूबसूरत चेहरे की दर्दरनाक कहानी
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नई दिल्ली:

बॉलीवुड में अगर कोई जादुई आईना होता जिससे हसीन एक्ट्रेस पूछतीं कि सबसे सुंदर कौन. तो शायद हर हसीना को दरकिनार कर आईना एक ही एक्ट्रेस का नाम लेता. किसी ख्वाब से भी ज्यादा हसीन इस एक्ट्रेस का नाम है मधुबाला. मुस्कुराती आंखें, मासूम चेहरा और बेमिसाल अदाकारी जिनकी पहचान रही. लेकिन इस खूबसूरती के पीछे छिपा था एक ऐसा सच जिसने उनकी जिंदगी को बहुत छोटा और बेहद तकलीफदेह बना दिया. शौहरत, मोहब्बत और कामयाबी सब कुछ होते हुए भी मधुबाला एक खुशहाल जिंदगी नहीं जी पाईं. प्यार अधूरा रह गया, सेहत ने साथ छोड़ दिया और महज 36 साल की उम्र में उनकी जिंदगी का दिया हमेशा के लिए बुझ गया.

मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था. वो बचपन से ही फिल्मों में काम करने लगी थीं ताकि परिवार की आर्थिक मदद कर सकें. कम उम्र में ही वो सुपरस्टार बन गईं.

कहा जाता है कि दिलीप कुमार से उनका प्यार सच्चा था. लेकिन पारिवारिक और कानूनी विवादों के चलते ये रिश्ता टूट गया. इस ब्रेकअप ने मधुबाला को अंदर से तोड़ दिया.

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बाद में उन्होंने किशोर कुमार से शादी की. लेकिन तब तक उनकी तबीयत काफी बिगड़ चुकी थी. उन्हें वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट, जन्म से दिल की बीमारी थी. जो वक्त के साथ गंभीर होती चली गई.

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तबीयत खराब होने के बावजूद मधुबाला ने कभी काम से पीछे हटने की कोशिश नहीं की. वो सेट पर दर्द छुपाकर मुस्कुराती नजर आती थीं.

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मुगल-ए-आजम की शूटिंग कई साल चली और भारी कॉस्ट्यूम और लंबा काम उनकी सेहत पर भारी पड़ा. इसी दौरान उनकी बीमारी और गंभीर हो गई. हालांकि इस फिल्म के साथ साथ उनका नाम भी बॉलीवुड में हमेशा के लिए अमर हो गया.

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मधुबाला के पूरे करियर में सिर्फ यही एक फिल्म है. जिसके लिए उन्हें फिल्म फेयर में बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन मिला था.

साल 1949 में आई मधुबाला की फिल्म महल, इंडियन सिनेमा की पहली हॉरर मूवी मानी जाती है

बीमारी की वजह से वो अक्सर शूटिंग नहीं कर पाती थीं. कई बार खून की उल्टियां तक हुईं, फिर भी उन्होंने काम नहीं छोड़ा.

डॉक्टर्स ने कहा कि उनका इलाज विदेश में संभव था. लेकिन परिवार ने इसकी इजाजत नहीं दी. आखिरी दिनों में मधुबाला घर तक सीमित हो गईं. 23 फरवरी 1969 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

आज भी मधुबाला को वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा कहा जाता है. लेकिन उनकी कहानी ये याद दिलाती है कि शोहरत हमेशा खुशी की गारंटी नहीं होती.

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